किशोरी को अगवा करके बदायूं जिले के थाना मूसाझाग में गैंगरेप करने का एक आरोपी अवनीश तो नाटकीय ढंग से पुलिस के हाथ लग गया, लेकिन उसके साथी वीरपाल को पकड़ना आसान नहीं है। बदायूं के एक पूर्व मंत्री का करीबी होने की वजह से वह कहने को ही सिपाही था, दरोगा और दीवान की भी उसके सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। वीरपाल यादव के शाहजहांपुर में छुपे होने की सूचना है। उसके रिश्तेदारों की भी वहीं लोकेशन मिल रही है। वहां वह एक सपा नेता की शरण में बताया जा रहा है।
एसटीएफ और पुलिस की टीमें शाहजहांपुर पहुंचकर उसे गिरफ्तार करने के लिए प्रयास कर रही हैं। इस बीच गिरफ्तार सिपाही अवनीश यादव को मंगलवार को स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) अनिल कुमार के न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने इसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
इधर, फरार दूसरे सिपाही वीरपाल यादव की गिरफ्तारी के लिए विवेचक के आग्रह पर कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
दोनों आरोपी को कई खौफ नहीं था
31 दिसंबर को किशोरी से गैंगरेप करने के बाद वीरपाल यादव और उसके साथी अवनीश यादव को कोई खौफ नहीं था। नए साल के पहले दिन दोपहर एक बजे उनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया। इससे पहले 11.30 बजे तक उनकी लोकेशन थाने में ही थी। पूर्व मंत्री के करीबी होने की वजह से वीरपाल ने मुकदमे को बेहद हल्के में लिया, लेकिन उसने अपने आका से फोन पर बात करने की कोशिश की तो फोन नहीं उठा। इसके पीछे वजह यह थी कि तब तक नेता जी को उसके खिलाफ मुकदमा लिखने की खबर मिल चुकी थी।
वीरपाल ने इटावा का रुख किया था। सूत्रों के मुताबिक इटावा में उसका सत्ता से जुड़े एक बडे़ नेता की शरण में जाने का इरादा था, लेकिन वहां से भी उसे मदद न कर पाने का संकेत मिल गया। बदायूं में पूर्व मंत्री ने भी इस मामले में फौरी तौर पर मदद करने से इनकार कर दिया। अवनीश की गिरफ्तारी के बाद से वीरपाल के रिश्तेदारों की लोकेशन शाहजहांपुर मिल रही है। वीरपाल वहां भी किसी सपा नेता की शरण में बताया जा रहा है। रिश्तेदार का मूवमेंट शाहजहांपुर में होने की वजह से पुलिस की टीमें वहां तलाश कर रही हैं। बताया जा रहा है अगले सप्ताह किशोरी की स्लाइड रिपोर्ट पुलिस को मिल सकती है। वह रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है।
डीआईजी आरकेएस राठौर का कहना है कि वीरपाल की गिरफ्तारी की कोशिश जारी है। उसे पकड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों सिपाहियों ने जो अपराध किया है उसकी सजा हर हाल में मिलेगी। बर्खास्त होने के बाद अब वह अपराधी हैं, किसी के साथ रियायत नहीं होगी।
अवनीश की गिरफ्तारी भी नाटक थी
गिरफ्तारी कोई भी हो, पुलिस की ज्यादातर कहानियां अक्सर गढ़ी हुई होती हैं। गैंगरेप के आरोपी बर्खास्त सिपाही अवनीश यादव की जिस तरह जंक्शन के पास से नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी दिखाई गई, उस पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये है कि जिस आरोपी के पीछे एसटीएफ समेत कई जिलों की पुलिस पड़ी है, वह बरेली जंक्शन पर भागने के लिए क्यों आएगा? अमर उजाला ने इस कहानी की पड़ताल को तो जांच एजेंसियों के हवाले से मालूम हुआ कि अवनीश भी सपा नेताओं की शरण में था और बरेली के एक सपा नेता ने ही उसके मामा के जरिए उसे पुलिस को सौंपा।
टुंडला से दिल्ली जाने के बाद शाहजहांपुर पहुंचे अवनीश यादव को उसने मामा यह कहकर बरेली लाए थे कि कब तक पुलिस के भागता रहेगा। चल तुझे हाजिर करा देते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यहां सपा नेता ने एक पुलिस अधिकारी से संपर्क साधा और अवनीश के बारे में बता दिया। सोमवार की शाम को ही अवनीश बरेली पहुंच गया था। इस बीच बदायूं से सीओ उझानी को भी बुला लिया गया। इसके बाद पुलिस ने कहानी बनाकर संयुक्त आपरेशन में अवनीश की गिरफ्तारी का दावा किया। प्लानिंग के तहत चेकिंग अभियान के बहाने पुलिस जंक्शन रोड के होटलों पर पहुंची। वहां पहले से मामा अवनीश को लिए खड़े थे। प्लानिंग के हिसाब से उसे पुलिस को सौंप दिया गया।
वहां से पुलिस ने उसे लाकर कोतवाली में बैठाकर मीडिया कर्मियों को बता दिया। इसी दौरान कोतवाली के इंस्पेक्टर अनिल समानिया ने उसे दाखिल करने के बाद रातों रात बदायूं के लिए रवाना करा दिया। अवनीश के पास खर्चे के लिए रुपये न होने पर भी उसकी वीरपाल से नहीं बन रही थी। इसलिए वीरपाल ने उसका साथ छोड़ दिया था।
अवनीश यादव को भेजा गया जेल
मूसाझाग थाने में नाबालिग से गैंगरेप के आरोपी बर्खास्त सिपाही अवनीश यादव को मंगलवार को स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) अनिल कुमार के न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने इसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। इधर, फरार दूसरे सिपाही वीरपाल यादव की गिरफ्तारी के लिए विवेचक के आग्रह पर कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
अवनीश ने जेल जाते समय कई बार चिल्ला-चिल्ला कर कहा कि मैं पूरी तरह से निर्दोष हूं। मेरी किसी ने नहीं सुनी। मुझे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। उसने मांग की कि पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी। जिला अस्पताल में मेडिकल और कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस ने उसे मीडिया से बात नहीं करने दी।
मूसाझाग थाने में 31 दिसंबर, 14 की रात सिपाही वीरपाल यादव और अवनीश यादव ने नाबालिग से गैंगरेप किया था। आरोपी सिपाही अवनीश यादव को बदायूं और बरेली की पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार रात बरेली जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया था। मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच अवनीश यादव को जिला अस्पताल में डॉक्टरी के बाद कोर्ट में पेश किया गया था।
पैनल ने लिए डीएनए टेस्ट के लिए नमूने
जिला अस्पताल में तीन डॉक्टरों के पैनल ने अवनीश यादव का मेडिकल किया। इस दौरान डीएनए टेस्ट के लिए नमूने भी लिए गए। इन नमूनों को बुधवार को लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके वर्मा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरपाल सिंह और पैथोलॉजिस्ट डॉ. एपी गौतम ने मेडिकल करने के बाद अवनीश के बाल, नाखून, रक्त और मुंह की लार के नमूने लेकर सील किए गए। मामले की विवेचना कर रहे एसओ मूसाझाग अशोक कुमार ने बताया कि जरूरत होने पर लखनऊ से यह नमूने डीएनए टेस्ट के लिए हैदराबाद भेजे जा सकते हैं।
छठे दिन भी नहीं मिली वीरपाल की लोकेशन
गैंगरेप के आरोपी सिपाही वीरपाल यादव की पुलिस छठे दिन भी लोकेशन तलाश नहीं कर सकी। मंगलवार को पुलिस ने पंडित जी पेट्रोल पंप के पास वीरपाल यादव के किराए के मकान पर भी छापा मारा, जहां पुलिस को कुछ नहीं मिला। घटना के बाद से ही वीरपाल अपने परिवार समेत फरार चल रहा है।
दोनों सिपाहियों की गिरफ्तारी के लिए पांच थानों के एसओ के साथ एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम को लगाया गया था। पुलिस ने पांचवें दिन अवनीश यादव को तो बरेली जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया लेकिन वीरपाल यादव की लोकेशन तलाशने में नाकाम है। एसपी सिटी लल्लन सिंह ने बताया कि सभी टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
सीओ उझानी का पीएसी में तबादला
गैंगरेप के आरोपी सिपाही अवनीश यादव को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाने वाले सीओ उझानी नरेंद्रपाल सिंह का तबादला पीएसी की जौनपुर बटालियन में कर दिया गया है।