सालभर से चली आ रही मोदी लहर की हवा धीरे धीरे निकलती दिख रही है। दिल्ली के बाद बिहार में भी भाजपा को आने वाले चुनावों में झटका लग सकता है। न्यूज चैनल एबीपी-नीलसन के सर्वे में जेडीयू-राजद के गठबंधन के सामने भाजपा गठबंधन पिछड़ता दिख रहा है।
हैरत की बात ये है कि भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार माने जा रहे सुशील मोदी सर्वे के अनुसार नीतीश के सामने कहीं भी टिकते नजर नहीं आ रहे हैं। सुशील मोदी वर्तमान मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से भी पिछड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। जबकि उन्हें ही भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद बताया जा रहा था।
माना जा रहा है वर्तमान राजनीतिक संकट में जीतन राम मांझी को सपोर्ट करने से भाजपा को फायदे के बजाय नुकसान होता दिख रहा है। इससे उसके मुकाबले जीतन मांझी की शख्सियत बिहार में ज्यादा मजबूत होती दिख रही है।
हालिया उठापटक के बीच भी मांझी एक बड़े नेता के तौर पर सामने आए हैं। जिसमें दलित-महादलित समुदाय को आस दिखाई दे रही है।
क्या कहता है सर्वे
एबीपी न्यूज-नीलसन द्वारा कराए गए त्वरित सर्वे के अनुसार अगर अभी चुनाव होते हैं तो जेडीयू और उसके नेता नीतीश कुमार खासे फायदे में रह सकता है। सर्वे के अनुसार जेडीयू गठबंधन को चुनावों में 57 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है जबकि भाजपा गठबंधन उसके मुकाबले काफी पीछे 41 फीसदी वोट लेकर रह सकता है।
भाजपा के लिए सबसे बड़ा झटका तो उसके बिहार में सबसे बड़े नेता सुशील मोदी को लेकर लग सकता है। जिन्हें सर्वे के अनुसार नीतीश कुमार और मांझी के बाद तीसरे नंबर पर रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में लोगों के दिमाग में आज भी नीतीश कुमार की विकास पुरुष के तौर पर बनी छवि ज्यादा मजबूत हुई है।
राज्य के 52 फीसदी लोग उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद मानते हैं जबकि सुशील मोदी मात्र 10 फीसदी लोगों की पसंद हैं। वहीं मुख्यमंत्री मांझी 16 फीसदी पसंद के साथ दूसरे नंबर पर हैं।
अगर सर्वे को आधार माना जाए तो हालिया दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी के हाथों पटखनी खा चुकी भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी साबित होने वाले हैं।
राजनीतिक उठापटक के लिए नीतीश कुमार हैं जिम्मेदार
हालांकि सर्वे में खास बात ये रही कि जब उनसे पूछा गया कि हालिया घटनाक्रम के लिए लोग किसे जिम्मेदार मानते हैं तो अधिकतर लोगों ने इसके लिए नीतीश कुमार को दोषी माना। सर्वे के अनुसार बिहार में राजनीतिक संकट के लिए 66 फीसदी लोग इसके लिए नीतीश कुमार को जिम्मेदार मानते हैं।
वहीं काफी लोग यह भी मानते हैं कि मांझी की बगावत का नीतीश कुमार को नुकसान उठाना पड़ेगा। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। 56 फीसदी लोग मानते हैं कि मांझी की बगावत का फायदा भाजपा को मिलेगा। जबकि 38 फीसदी लोगों का मानना है कि जेडीयू इसका फायदा उठाने में सफल रहेगी।
हालांकि चार फीसदी लोग ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि दोनों पार्टियों को इसका फायदा मिल सकता है। सर्वे 14 से 18 फरवरी के बीच किया गया था जिसमें कुल 2456 लोगों से बातचीत की गई।