अब तक केवल विश्वविद्यालयों को ही डिग्री देने का अधिकार प्राप्त है लेकिन अब कुछ कॉलेज भी डिग्री जारी कर सकेंगे।
मानव संसाधन मंत्रालय ने 441 स्वायत्त कॉलेजों को डिग्री देने का अधिकार देने का फैसला किया है। इसके लिए कॉलेजों को विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया जाएगा।
विश्वविद्यालयों पर बढ़ते बोझ और कॉलेजों को मजबूत करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके लिए यूजीसी कानून में संशोधन किया जाएगा।
12वीं योजना के अंत में इन 441 कॉलेजों में से 45 को विश्वविद्यालय में परिवर्तित कर डिग्री जारी करने का अधिकार देने की योजना है। यह फैसला यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय के साथ चयनित स्वायत्त कॉलेजों की सोमवार को हुई बैठक में लिया गया।
विश्वविद्यालयों पर ज्यादा बोझ
मंत्रालय के अनुसार विश्वविद्यालयों पर संबद्घ कॉलेजों का भार कम कर यहां शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय जरूरी समझा गया है। अत्यधिक कॉलेजों के संबद्घ होने और उनसे जुड़े काम के चलते विवि में अधिकतर समय रोजाना के प्रशासनिक कार्यों में ही चला जाता है। इससे शोध और अनुसंधान के लिए बहुत कम समय बचता है।
यहां तक कि जो कॉलेज शोध संबंधी कार्यों में सक्षम हैं, नियमों के चलते उनके भी हाथ बंध जाते हैं।
शिक्षा सचिव अशोक ठाकुर के मुताबिक इस नई व्यवस्था से कॉलेजों को भी संबद्घता के चलते सीमित भूमिका से बाहर निकलने में मदद दिला सकती है। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद से (नेक) 'ए' ग्रेड प्राप्त कॉलेजों को डीम्ड विश्वविद्यालय में परिवर्तित कर ऐसा किया जा सकता है।
दो महीनों में इस संबंध में सिफारिशों को अंतिम रूप दिया जाएगा। जो कॉलेजों परिवर्तित होने के इच्छुक हैं उन्हें 55 करोड़ रुपए भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 12वीं योजना में इसके लिए 2,475 करोड़ रुपए रखे गए हैं।