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पहले ही इम्तिहान में फेल हुआ 'जनता परिवार'

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झारखंड के विधानसभा चुनावों ने जहां भाजपा को सरकार बनाने का मौका दे दिया है वहीं इन नतीजों ने सेक्युलेरिज्म के नाम पर इकट्ठा हुए कथित जनता परिवार को पहले इम्तिहान में ही फेल कर दिया है।
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देश को बचाने के नाम पर एकजुट होने वाले महागठबंधन के दो बड़े दल लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल और नीतीश कुमार के जेडीयू का झारखंड के विधानसभा चुनावों में खाता भी नहीं खुल सका। जबकि दोनों बड़े दल पहली बार एकजुट होकर किसी चुनाव में उतरे थे।

यह हाल तब रहा जब दोनों दलों का झारखंड की राजनीति में अच्छा खास दखल रहा है। गत विधानसभा चुनावों में लालू के राजद के पास पांच सीटें थी वहीं नीतीश कुमार के जेडीयू ने भी दो सीटें जीतीं थीं, लेकिन इस बार के नतीजों ने दोनों दलों का जोर का झटका दे दिया। ऐसे में महागठबंधन के लिए झारखंड चुनावों के ये नतीजे शुभ संकेत नहीं माने जा सकते।
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झारखंड में लालू-नीतीश के गठबंधन का सूपडा साफ

देशभर में मोदी लहर के बाद राजनीति ने नई करवट ली है। लगातार जीत दर्ज करती मोदी लहर के सामने सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस की हार ने क्षेत्रीय दलों के सामने भी वजूद का संकट खड़ा कर दिया है।

ऐसे में अपनी साख बचाने और राजनी‌ति में वजूद बचाए रखने के लिए धुर विरोधी भी एक मंच पर आने को मजबूर हो गए। इसी के साथ पूरे धूम धड़ाके के साथ जनता परिवार के पुराने दिग्गजों समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और जेडीयू के नी‌तीश कुमार ने मोदी और केन्द्र सरकार के खिलाफ महागठबंधन की घोषणा की थी।

इनैलो और जेडीएस का साथ मिला तो दिग्‍गजों के इस गठबंधन ने दावे भी बड़े बड़े किए। झारखंड के हालिया विधानसभा चुनावों में इन्हीं दावों की परीक्षा थी लेकिन पहले ही इम्तिहान में इन दावों की हवा निकल गई।
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बिहार विधानसभा चुनावों के लिए बजी खतरे की घंटी

आलम ये रहा कि झारखंड की राजनीति में अच्छा खासा दखल रखने वाले लालू प्रसाद यादव पुराने दुश्मन नी‌तीश कुमार को साथ लेकर भी कोई कमाल नहीं कर सके। चुनावों में मोदी लहर के सामने कथित 'महागठबंधन' पहले ही झटके में उखड़ गया।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2009 के विधानसभा चुनावों में अकेले दम पांच सीटें जीतने वाला राष्ट्रीय जनता दल इस बार अपना खाता भी नहीं खोल सका, वहीं उनके साथ गलबहियां करने वाले नी‌तीश कुमार जेडीयू की पुरानी दो सीटों को भी नहीं बचा सके।

चुनावों से पूर्व बड़े-बड़े दावे करने वाले गठबंधन का चुनावी नतीजों में पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। जबकि इन्हीं चुनावों को गठबंधन की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा था।

ऐसे में हालिया नतीजों ने जनता परिवार के नाम पर इकट्ठा होने वाले दिग्‍गजों की तो उम्‍मीदों पर पानी फेरा ही, बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर भी इन दलों के सामने खतरे की घंटी बजा दी है।
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