सरकारी जमीन का 27 जजों के आवंटन को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट के सामने कई नाटकीय दृश्य पैदा हुए। सुनवाई के दौरान वकीलों के साथ हो रही जोरदार बहस के बीच चीफ जस्टिस वीएम सहाय ने यह बात भी कह दी कि कोर्ट में कई ऐसे घोटालों के मामले लंबित हैं जिनमें जजों के नाम शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब जस्टिस सहाय ने कहा कि जनहित याचिका के मुद्दे पर उन्होंने कोर्ट से सभी जजों से राय मांगी थी लेकिन किसी ने भी मुझसे बात नहीं की। उन्होंने कहा, 'उन लोगों लगता है कि मुझमें हिम्मत नहीं है। जहां तक हिम्मत की बात है मुझे मायावती और मुलायम भी जानते हैं।' हालांकि उन्होंने इस बात का ब्यौरा नहीं दिया। इससे पहले बंद कमरे में चल रही सुनवाई के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट में 'घोटाले के कई मामले' हैं।
जिन जजों को जमीन के अवैध आवंटन के मामले में नोटिस भेजा गया है उनके वकील की दलील सुनने के बाद जस्टिस सहाय ने कहा कि एक ऐसा कंप्यूटर घोटाला भी है जिसमें एक जज के सगे भतीजे को इसके सप्लाई का ठेका दिया गया था। 1,101 कंप्यूटर दिया गया और करोड़ों का फर्जीवाड़ा हुआ। जज के भतीजे ने 2.79 करोड़ रुपये के कीमत के खराब कंप्यूटर्स की सप्लाई की थी। इस मामले को जस्टिस भट्टाचार्य ने खारिज कर दिया था। (पूर्व चीफ जस्टिस भास्कर भट्टाचार्य)