एक भारतीय युवती ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर परचम लहरा कर इतिहास रच दिया है।
25 वर्षीय अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला बन गई हैं।
अरुणिमा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की रहने वाली हैं।
नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि टाटा ग्रुप से इको एवरेस्ट एक्सपिडिशन की सदस्य अरुणिमा मंगलवार सुबह 10.55 बजे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी (8,848 मीटर) पर पहुंच गई।
सोमवार को अरुणिमा का चार सदस्यीय दल कैंप-4 (ऊंचाई- 7900 मीटर) पहुंचा था। यहां से आराम करने के बाद उन्होंने आगे की चढ़ाई शुरू कर दी थी।
31 मार्च को चार सदस्यीय दल में शामिल अरुणिमा ने एवरेस्ट पर चढ़ाई की दुर्गम यात्रा शुरू की थी। अरुणिमा का पूरा परिवार इस उपलब्धि को लेकर बुहुत उत्साहित है।
पिछले साल ही अरुणिमा ने लद्दाख के 6,622 मीटर ऊंचाई वाले माउंट चमशेर कांगड़ी पर चढ़ाई करने में सफलता हासिल की थी।
मगर उनका लक्ष्य तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचना था। एक दिन पहले ही देहरादून की जुड़वां बहनें ताशी और नैन्सी मलिक ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
मालूम हो कि वॉलीबॉल खिलाड़ी अरूणिमा सिन्हा को दो साल पहले बरेली में चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया था।
अब अरूणिमा चलने के लिए नकली टांग का इस्तेमाल करती हैं। एम्स से आर्टीफिशिल पैर लगने के बाद अरुणिमा ने गजब का उत्साह दिखाते हुए पहले की तरह खेलना शुरू कर दिया था।
इस बीच उन्होंने एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बछेन्द्री पाल से मिलकर अपनी एवरेस्ट पर चढ़ने की इच्छा जताई।
इसके बाद अरुणिमा ने पिछले साल उत्तरकाशी में टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन कैंप में बछेंद्री पाल के नेतृत्व में ट्रेनिंग शुरू की थी।
ट्रेनिंग के दौरान अरुणिमा ने भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की ओर से स्थापित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटनेरिंग में आम पर्वतारोहियों के बीच रहकर बेसिक कोर्स भी किया।
‘एक समय था, जब हर कोई मेरे लिए चिंतित था। मुझे महसूस होने लगा था कि कुछ ऐसा करना होगा, जिससे लोग मेरी तरफ दया से न देखें। अखबार में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले लोगों के बारे में पढ़कर मैंने अपने भाई और कोच से अपनी इच्छा जताई। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।’
-अरुणिमा सिन्हा