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राष्ट्रपति से की अरुणाचल के राज्यपाल की शिकायत

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केंद्र पर अरुणाचल प्रदेश की सरकार को बेदखल करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेतााओं ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा के जरिए प्रदेश सरकार को 'पूर्व नियोजित योजना' के तहत बेदखल करने का प्रयास कर रही है।
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कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के समक्ष राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा। राष्ट्रपति भवन परिसर में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता कांग्रेस के चंद असंतुष्ट विधायकों के साथ मिलकर आरुणाचल की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले अरुणाचल विधानसभा का तीन दिन का शीत सत्र बुलाने का आदेश दिया है। पहले शीत सत्र का 14 जनवरी से 18 जनवरी तक बुलाया जाना था, लेकिन उन्होंने इसे 16 से 18 दिसंबर तक बुलाने का आदेश दिया। राज्यपाल के आदेश से राज्य में राजनीतिक अस्थिरिता के हालात पैदा हो गए हैं।
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14 विधायकों का अयोग्य घोषित किया गया

कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल केंद्र के नेताओं के कहने पर ऐसा कर रहे हैं। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश का विधानसभा सत्र 14 जनवरी को शुरू होना था, लेकिन राज्यपाल ने मुख्यमंत्री, कैबिनेट और विधानसभा अध्यक्ष से सलाह लिए बिना इसे पहले बुला लिया।

उन्होंने कहा कि संविधान में ये स्पष्‍ट है कि चाहे केंद्र हो या राज्य सत्र बुलाने को अधिकार केवल सरकार के पास होगा। तारीख तय करने के बाद सरकार राष्ट्रपति या राज्यपाल से अनुरोध करती है कि वे सत्र बुलाने का आदेश दिया था।

अरुणाचल के राज्यपाल के मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्यसभा में भी हंगामा किया। संसद में कांग्रेस के सदस्यों ने राज्यपाल को बर्खास्त करने की मांग की। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस 14 बागी विधायकों को बुधवार को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 47 व‌िधायक है, हालांकि उनमें से 21 ने मुख्यमंत्री नाबाम तुकी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर रखा है।
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