लोकपाल विधेयक का समर्थन करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि इस बिल के पारित होने से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बड़ी मदद मिल सकेगी।
हालांकि उन्होंने लोकपाल की नियुक्ति में धर्म आधारित आरक्षण पर आपत्ति जाहिर की।
जेटली ने कहा कि संविधान इस प्रकार की अनुमति नहीं देता है। जेटली ने सरकार से यह भी साफ करने को कहा कि छापे या तलाशी के पहले संबंधित अधिकारी को नोटिस नहीं जारी किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जांच के कई मामलों में जब छापे या तलाशी अनिवार्य होता है तो ऐसे में नोटिस की जरूरत नहीं रह जाती है। इस पर कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने जेटली को आश्वस्त करते हुए कहा कि छापे या तलाशी के पहले नोटिस जारी करने का प्रावधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए यह कानून जरूरी है। उन्होंने जिक्र किया कि पहले विधेयक में लोकपाल को हटाने का अधिकार केंद्र के पास था। लेकिन नए प्रावधान के मुताबिक लोकपाल को हटाने या निलंबित करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को दिया गया है।
जबकि सभी राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति करने की बात भी कही गई है। इसके बावजूद विधेयक में सुधार की काफी गुंजाइश है। सिटीजन चार्टर का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि कई राज्यों में इससे संबंधित कानून बन चुका है।
संसद से भी नागरिक शिकायत निवारण विधेयक और व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल जल्द पारित कराना चाहिए।