विवादों से घिरे सेंसर बोर्ड में बदलाव होना तय है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि समय आ गया है जब सेंसर बोर्ड की कार्यपद्धति पर एक बार फिर से गौर किया जाए। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड को वह विवाद मुक्त देखना चाहते हैं और इसके लिए विशेषज्ञों से बातचीत भी कर रहे हैं कि भविष्य में इस इकाई की क्या भूमिका होनी चाहिए।
जेटली ने कहा, "मुझे पूरा यकीन है कि प्रमाणन बोर्ड की भूमिका पर गौर करने का वक्त आ गया है। प्रमाणन बोर्ड के पूरी तरह विवाद मुक्त होने की जरूरत है। इसे लेकर मेरा अपना कुछ नजरिया है और मैं विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहा हूं कि भविष्य में इस इकाई की क्या भूमिका होनी चाहिए।"
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), जिसे सेंसर बोर्ड के नाम से भी जाना जाता है, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली संवैधानिक सेंसरशिप और वर्गीकरण इकाई है और इसका काम सिनेमैटोग्राफ कानून, 152 के तहत फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन का नियमन करना है।
फिलहाल, पहलाज निहलानी सेंसर बोर्ड के प्रमुख हैं और बीते महीनों में कई बार अपने निर्णयों के कारण विवादों में रहे हैं। पिछली गर्मियों में 'एमएसजीः द मैसेंजर' पर हुए विवाद के बाद यूपीए सरकार के जमाने में नियुक्त लीला सैमसन ने सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राजग सरकार ने पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया। हालांकि वे विवादों से घिरते गए। आखिर ऐसा क्या हुआ के सेंसर बोर्ड 'कंट्रोवर्सी बोर्ड' बन गया, पढ़िए आगे की स्लाइडों में-
'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' बनी थी पहली शिकार
लोकसभा चुनावों से पहले पहलाज निहलानी नरेंद्र मोदी के समर्थन में एक वीडियो 'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' बनाया था। 29 सालों तक वे एसोसिएशन ऑफ मोशन पिक्चर्स एंड टीवी प्रोग्राम प्रोड्युसर्स के अध्यक्ष रहे। 'शोला और शबनम' और आंखे के निर्माता के रूप में उन्हें अधिक जाना गया, हालांकि उन्होंने तकरीबन 17 फिल्मों का निर्माण किया।
लोकसभा चुनावों के बाद राजग सरकार ने सेंसर बोर्ड के आमूलचूल बदलाव किया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों को फिल्मों को सर्टिफिकेट देने काम सौंप दिया। मोदी के पैरोकारी कर ईनाम पहलाज निहालानी को सेंसर बोर्ड की रहनुमाई के रूप में मिला। हालांकि कुर्सी पर बैठते ही उन्होंने अपने विचार और विचारधारा को स्पष्ट करना शुरु कर दिया।
निहलानी के 'संस्कारी रवैये' की पहली शिकार हॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' बनी। उन्हें फिल्म के 'आपत्तिजनक' दृश्यों पर ऐतराज था। 70 कट लगाने के वादा करने के बाद फिल्म को हिंदुस्तान में रिलीज नहीं होने दिया गया।
वायरल हो गई थी 'Cuss Words' की सूची
दर्शकों को संस्कारी और सिनेमा को पारिवारिक बनाने के लिए सेंसर बोर्ड ने अगला कदम उठाया। पिछले साल फरवरी में इंटरनेट पर ऐसे शब्दों की एक सूची वायरल हो गई, जिनके प्रयोग पर बोर्ड को आपत्ति थी। 'Cuss Words' ये सूची पहलाज निहालानी ने सेंसर बोर्ड के सदस्यों को भेजी थी।
इस सूची में बांबे, रखैल और कुतिया जैसे अंग्रेजी के 13 और हिंदी के 15 शब्द शामिल थे। ये सूची ऐसी थी कि एक बारगी बॉलीवुड की सभी फिल्में सेंसर बोर्ड की कैंची का शिकार हो जाती। मिहिर जोशी के एक गीत से 'बांबे' शब्द को हटा दिया गया।
निहलानी की उस सूची का विरोध बॉलीवुड के साथ ही सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने भी किया। अगस्त में सेंसर बोर्ड की बैठक में अधिकांश सदस्यों ने उस सूची के विरोध में वोट किया, जिससे निहलानी के मंसूबों पर पानी फिर गया।
करण जौहर पर हुई आपत्तिजनक टिप्पणी
सेंसर बोर्ड के एक सदस्य अशोक पंडित ने फरवरी में बॉलीवुड निर्माता करण जौहर पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। पिछले साल जनवरी में कॉमेडी समूह एआईबी ने 'एआईबी रोस्ट' नाम से एक शो किया। शो के 'होस्ट' करण जौहर थे, जबकि रोस्ट रणबीर कपूर और अर्जुन कपूर। शो के संवाद और कलाकारों की कई हरकतें ऐसी थी, जिसकी तीखी आलोचना की गई।
आमिर खान सहित बॉलीवुड के कई कलाकारों ने शो के कंटेंट यानी विषयवस्तु पर आपत्ति जताई थी। हालाांकि सेंसर बोर्ड के सदस्य अशोक पंडित ने उस विवाद को तब और भौंडा बना दिया, जब उन्होंने करण जौहर पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।
अशोक पंडित ने ट्विटर पर लिखा, ''करण जौहर सेक्स करते हुए अपनी पोजिशन घर पर मां को दिखा सकते थे, बजाय पब्लिक को दिखाने के। #AIB Porn Show.
बाद में पंडित और निहलानी में भी तकरार हुई। निहलानी से नाराज होकर पंडित ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा,''फिल्म दर फिल्म उनकी (पहलाज निहलानी) मुर्खतापूर्ण निरंकुशता का मासूम शिकार बन रही हैं। उनके बेतुके आदेशों और तानाशाही कार्यशैली ने CBFC को हंसी का पात्र बना दिया है।
'संस्कारी कैंची' ने जेम्सबांड को भी नहीं बख्शा
निहलानी की 'संस्कारी कैंची' ने हॉलीवुड फिल्म जेम्सबांड को भी नहीं बख्शा। डेनियल क्रेग अभिनीत मशहूर हॉलीवुड की मशहूर जासूसी थ्रिलर जेम्सबांड की फिल्म 'स्पेक्टर' में चार कट लगाए। फिल्म से 'asshole' और 'balls' जैसे दो शब्दों को हटाकर "idiot" और "cats" डाल दिया गया।
स्पेक्टर को U/A प्रमाणपत्र दिया गया। फिल्म के दो किसिंग सीन्स को काटा गया। इन दृश्यों की लंबाई आधी की गई और तकरीबन 54 सेकंड के दृश्यों को काट दिया गया। हालांकि जब ये खबर लीक हुई तो सोशल मीडिया निहलानी पर बरस पड़ा। ट्विटर और फेसबुक पर 'संस्कारी जेम्सबांड' हैश टैग ट्रेंड करने लगा।
निहलानी ने अपने फैसले की सफाई में कहा, ''अगर फिल्म को पारिवार के सदस्यों के द्वारा देखा जाना है, तो ऐसे दृश्यों को पास नहीं किया जा सकता। इस मसले पर दिए एक अन्य बयान में उन्होंने कहा, ''क्या आप दरवाजे खुले रखकर सेक्स करना चाहते हैं।"
निहालानी के उस बयान ने और चौंका दिया, जब उन्होंने टाइम्स नाऊ को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने 'स्पेक्टर' का एक भी शॉट नहीं देखा है। फिर भी फिल्म की गई कटौती का समर्थन करते हैं। रोचक बात ये रही कि निहलानी अपने आलोचनाओं से तनिक भी पेरशान नहीं हुए और 'संस्कारी' शब्द को कॉपीराइट करा लिया।
मस्तीजादे और KKHH 3 को कर दिया पास
इसी महीने सेक्स कॉमेडी कही जा रही दो फिल्मों के ट्रेलर रीलीज हुए, पहली 'मस्तीजादे' और दूसरी 'क्या कूल है हम 3'। दोनों ही ट्रेलर के दृश्यों और संवादों पर सवाल उठा। हालांकि सेंसर बोर्ड ने उसे पास कर दिया, जिससे नाराज होकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय को सेंसर बोर्ड से जवाब मांगना पड़ा।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड से पूछा कि उसने वल्गर दृश्यों और संवादों को हरी झंडी कैसे दे दी। निहलानी ने अपने जवाब में कहा,''करो तो गाली, ना करो तो गाली। जब वल्गर दृश्यों पर आपत्ति करते हैं तो हमें पाखंडी कहा जाता है।"
इसके अतिरिक्त निहलानी के कार्यकाल में अनफ्रीडम, तितली, कुछ-कुछ लोचा है, हेट स्टोरी 3 और चार्ली के चक्कर में जैसी फिल्मों पर भी कैंची चली