मोदी सरकार के समर्थन में कलाकार, लेख और शिक्षाविद खुल कर उतर आए हैं। उन्होंने देश में कथित तौर पर बढ़ती असहिष्णुता के विरोध को ‘खास पोषित वर्ग’ की घटती रसूख की प्रतिक्रिया बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि वे अब प्रधानमंत्री को लक्ष्य कर रहे हैं।
असहिष्णुता के माहौल पर केंद्र सरकार पर हमला बोलने वाले बुद्धिजीवियों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि देश के बुद्धिजीवियों का एक वर्ग लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत से दुखी थे और चुनाव की हार का बदला वे दूसरे तरीके से लेना चाह रहे हैं।