सुप्रीम कोर्ट ने हथियारों की गैरकानूनी बिक्री के मामलों में संलिप्त सेना के बड़े अधिकारियों को सिर्फ फटकार और मामूली जुर्माना लगाकर छोड़े जाने पर नाराजगी व्यक्त की है।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उसके सामने इस संवेदनशील मसले पर सेना की सभी कमानों में जांच का आदेश देने का विकल्प खुला हुआ है।
जस्टिस एचएल दत्तू और शरद अरविंद बोबडे की बेंच ने कहा कि वह दक्षिण पश्चिम कमान तक अपनी जांच सीमित रखने की बजाय सेना की सभी कमान में जांच का आदेश देने पर विचार कर सकती है। सेना की दक्षिण पश्चिम कमान में ही इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
बेंच ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों में लिप्त अधिकारियों को उनके अपराध के अनुरूप दंड नहीं दिया गया है और इससे अदालत की अंतरात्मा को भी धक्का लगा है। इस तरह की गतिविधियों में मेजर, लेफ्टिनेंट कर्नल और कर्नल रैंक के अधिकारी तक संलिप्त रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें संलिप्त गिरोह के सदस्यों द्वारा खिलौनों की तरह बाजार में खुलेआम हथियार और गोला बारूद बेचा जा रहा है और हो सकता है कि इसमें से कुछ आतंकवादियों के हाथ लग गया हो और निर्दोष व्यक्तियों की हत्या में इनका इस्तेमाल हुआ हो।
बेंच ने कहा कि स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी को सरकार से निर्देश प्राप्त करके बताना चाहिए कि क्यों नहीं इस याचिका का दायरा बढ़ाकर सभी कमान में जांच करायी जाये और क्यों नहीं ऐसे अधिकारियों को दिया गया दंड निरस्त करके इसे बढ़ाने के लिये नये सिरे से जांच पर विचार किया जाये।