महाभारत का वह काल...गुरु द्रोणाचार्य तो शिष्य अर्जुन और कर्ण जैसे धुरंधर धनुर्धर। यह तो हुई हजारों साल पहले की बात। अब आधुनिकता की सीढ़ियों पर सवार पीढ़ी पर नजर डालें।
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अर्जुन और कर्ण जैसे योद्धाओं की कर्मभूमि। मेरठ से करीब 25 किमी दूर जानीखुर्द के टीकरी स्थित गुरुकुल प्रभात आश्रम में शिक्षा-दीक्षा का माहौल वैदिक काल के किसी गुरुकुल जैसा। लेकिन, देश के लिए ऐसे धुनर्धर (तीरंदाज) तैयार कर रहा है, जो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं क्रांतिधरा का मान बढ़ा रहे हैं। इस गुरुकुल ने देश को दो ओलंपियन भी दिए हैं। यही नहीं, इंडियन राउंड और रिकर्व में यहां से निकले तीरंदाज अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
गुरुकुल प्रभात आश्रम में वर्ष-1993 में तीरंदाजी की ट्रेनिंग शुरू हुई थी। वर्ष-1997 में हुए राष्ट्रीय खेलों में आश्रम के तीरंदाजों ने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से गोल्ड हासिल किया।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने वाले खिलाड़ियों की लंबी फेहरिस्त
आश्रम से प्रशिक्षित 20 तीरंदाज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के रहे। इनमें से दो तीरंदाज सत्यदेव प्रसाद और वेद कुमार ओलंपियन बने। सत्यदेव प्रसाद ने वर्ष-2004 में ओलंपिक खेला। वह भारतीय टीम के सदस्य थे। वेद कुमार ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था, लेकिन चोटिल होने से खेल नहीं सके। इनके बाद भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने वाले खिलाड़ियों की लंबी फेहरिस्त है।
आश्रम में इस वक्त 10 तीरंदाज प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे रोजाना सात घंटे अभ्यास करते हैं। इनका मकसद ओलंपिक में मेडल हासिल करना है। खिलाड़ियों में कई राष्ट्रीय स्तर के हैं। चमन सिंह ने रिकर्व में नेशनल रिकॉर्ड बनाया है।
रिकर्व में चार खिलाड़ी चमन सिंह, सुमित, राजन और हेमंत आश्रम में ही रहकर प्रैक्टिस करते हैं। इंडियन राउंड में वर्षांत, सव्यसाची, निशांत, शिवम, अम्बरीश और प्रभात प्रैक्टिस करते हैं। सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह और दोपहर ढाई से शाम साढ़े छह बजे तक अभ्यास किया जाता है।
खिलाड़ियों को ट्रेनिंग पूर्व खिलाड़ी देते हैं। तीरंदाजी कोच वेद कुमार हैं। फिलहाल, वेद कुमार आईटीबीपी में इंस्पेक्टर हैं। वह बीच-बीच में आकर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते रहते हैं। पूर्व ओलंपियन सत्यदेव प्रसाद आदि भी गुरुकुल के तीरंदाजों को ट्रेंड करते हैं।
क्या कहते हैं आश्रम के युवा
यहां प्रशिक्षण ले रहे युवाओं का कहना है कि शहर से दूर शांत वातावरण में स्थित गुरुकुल उनकी साधना को परवान चढ़ाता है। फिलहाल, खिलाड़ी कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में होने वाली नेशनल प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं। आठ अक्तूबर को सीनियर्स का ट्रायल होना है।
'मैं चार साल से तीरंदाजी कर रहा हूं। नौ साल से आश्रम में हूं। माहौल इतना अच्छा है कि सीखने की ललक बढ़ जाती है। यह किसी भी स्पोर्ट्स एकेडमी से कम नहीं है।' - हेमंत, तीरंदाज
'आश्रम के खिलाड़ी ओलंपिक तक खेले हैं। तीरंदाजी का प्रशिक्षण यहां से बेहतर नहीं हो सकता। एकाग्रता के लिए पूरा माहौल है। आश्रम में सुविधा है।' - निशांत, तीरंदाज
'सीनियर खिलाड़ी सिखाने आते हैं। सुविधाएं और माहौल अच्छा है। तीरंदाजी की तपस्या के लिए आश्रम एकदम उपयुक्त जगह है। शेड्यूल के साथ निर्बाध प्रैक्टिस कर सकते हैं।' - अंबरीश, तीरंदाज
'ढाई साल से तीरंदाजी कर रहा हूं। आश्रम का इतिहास खेल में मनोबल बढ़ाता है। सीनियर खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखने को मिलता है। लगातार खिलाड़ी अच्छा कर रहे हैं।' - सव्यसाची, तीरंदाज
'गुरुकुल ने ओलंपियन तक तीरंदाज दिए हैं। वर्ल्ड कप और राष्ट्रीय खेलों में यहां के खिलाड़ियों ने खूब मेडल हासिल किए हैं। तीरंदाजी के लिए उपयुक्त माहौल दिया जा रहा है।' - त्रिनाथ, व्यवस्थापक, गुरुकुल प्रभात आश्रम
गुरुकुल प्रभात आश्रम में कक्षा छह से प्रवेश होता है। आश्रम एडमिशन के लिए अपना टेस्ट कराता है। आचार्य (एमए) तक की पढ़ाई आश्रम में होती है। नियम और अनुशासन आश्रम की परंपरा है।
आश्रम से निकले तीरंदाज नाम ------------ तैनाती वेद कुमार ------------ इंस्पेक्टर आईटीबीपी दिल्ली आदित्य ------------ प्रशिक्षक संपूर्णानंद विवि वाराणसी सत्यदेव प्रसाद ------------ प्रशिक्षक साई कोलकाता कैलाश ------------ इंस्पेक्टर सीआरपीएफ दिल्ली प्रियंक ------------ इंस्पेक्टर आईटीबीपी दिल्ली विकास ------------ प्रशिक्षक साई पटियाला राजमणि ------------ प्रशिक्षक साई कोलकाता मंगल ------------ टीटी पूर्वी रेलवे कोलकाता