कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने रविवार को साफ किया कि प्रस्तावित दुष्कर्म निरोधी विधेयक के तमाम प्रावधानों को लेकर मंत्रालयों के बीच कोई मतभेद नहीं है।
कुमार ने कहा कि कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय के बीच कोई मतभेद नहीं है। हम देश को ऐसा कानून देना चाहते हैं जिसका वास्तव में कोई प्रभाव पड़े। तीन-चार मसौदों पर विचार हो चुका है। हम अपने प्रस्ताव भी दे चुके हैं।
मुझे विश्वास है कि अगले हफ्ते कैबिनेट विधेयक पर विचार करेगी। कुमार ने कहा कि इससे संबंधित प्रस्तावों को समुचित विचार-विमर्श के बाद केंद्रीय केबिनेट के समक्ष भेजा जाएगा।
कानून मंत्री ने कहा कि अभी तक कानून बनाए जाने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और सरकार प्रस्तावित आपराधिक कानून संशोधित विधेयक 2013 को संसद में विचार-विमर्श के लिए आगे बढ़ा सकती है।
कानून मंत्री के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध पर लाए गए अध्यादेश को प्रस्तावित विधेयक से बदला जा सकता है ताकि उसमें कोई कमी न रह जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में विधेयक को नहीं रखा गया था क्योंकि गृह मंत्रालय कानून मंत्रालय की ओर से रखे गए प्रस्तावों का अध्ययन कर रहा था।
उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों के कई सुझावों को अस्वीकार कर दिया जो प्रस्तावित विधेयक के तमाम प्रावधानों की खिलाफत में थे।
कुमार ने कहा कि अध्यादेश पर महत्वपूर्ण तरीके से विचार-विमर्श किया गया था, उसके खिलाफ कोई मूल आपत्तियां नहीं उठी थीं।
प्रस्ताव के एक-दो बिंदुओं पर मतभेद हो सकता था और इसी कारण कैबिनेट की बैठक उन मुद्दों पर विचार-विमर्श के रखी गई थी। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों में सरकार 22 मार्च तक विधेयक को पेश करने की कोशिश करेगी।