भारत-पाक रिश्तों में आई तल्खी को खत्म करने की कोशिशों के बीच मुंबई यूनिवर्सिटी के हजारों छात्रों को 'पाकिस्तान की जबानी' भारत विरोधी पाठ पढ़ाया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के अंडर ग्रेजुएट कोर्स के फाउंडेशन कोर्स-द्वितीय की एक किताब में ऐसी सामग्री मौजूद है, जिसमें मानवाधिकार उल्लंघन, भारत में जाति विभाजन और भारतीय सेना व पुलिस द्वारा कथित जातीय भेदभाव का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि किताब की उपरोक्त विवादास्पद सामग्री पाकिस्तान की रक्षा वेबसाइट से कॉपी की गई है। इस किताब के एक चैप्टर 'ह्यूमन राइट्स वायलेशन एंड रिड्रेसल' को लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ है। चैप्टर के मुताबिक, 'भारत एक ऐसा देश है, जहां मानवाधिकार के हालात ठीक नहीं है। भारतीय सेना और पुलिस जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव करती है।' किताब के लेखक प्रोफसर माइकल वाज हैं।
प्रोफेसर वाज का इस संबंध में कहना है कि उन्हें नहीं मालूम था कि उनकी किताब में जो सामग्री है, वह पाकिस्तानी रक्षा वेबसाइट की है। उन्होंने कहा, 'मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन आपको यकीन दिलाता हूं कि नई पुस्तक से सभी विवादास्पद सामग्री हटा दी जाएगी। प्रोफेसर वाज ने किताब में यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) के जरिए बताया है कि उन्होंने यह साम्रग्री कहां से ली है। इसमें एक लिंक पाकिस्तानी रक्षा वेबसाइट की है।