आसाराम बापू, नारायण साईं, तरुण तेजपाल और जस्टिस ए के गांगुली...। ये सभी एक वक्त दिग्गजों में गिने जाते थे, अब जेल में हैं या दबाव की वजह से अपने पद को अलविदा कह चुके हैं। अब इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ सकता है।
पूर्व जस्टिस ए के गांगुली के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाने वाली अपनी सहपाठी की हिम्मत से प्रेरणा लेकर एक और युवती ने सामने आने का साहस दिखाया है।
कोलकाता की वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिशियल साइंसेज की पूर्व छात्रा ने देश के चीफ जस्टिस पी सदाशिवम के सामने शिकायत दर्ज कराई है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने उसे यौन रूप से प्रताड़ित किया है।
घटना के वक्त सिटिंग जज था आरोपी!
पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के प्रमुख के पद से दो दिन पहले इस्तीफा देने वाले जस्टिस गांगुली केस की तुलना में यह मामला इसलिए और महत्वपूर्ण है कि जब यह घटना कथित तौर पर हुई, आरोपी सुप्रीम कोर्ट में सिटिंग जज थे।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शिकायत करने वाली युवती आधिकारिक रूप से उनके ऑफिस में इंटर्न है। जबकि जस्टिस गांगुली पर जब यौन शोषण का इल्जाम लगा था, तो वह रिटायर हो चुके थे।
इस मामले में युवती की इंटर्नशिप मई 2011 में शुरू हुई, जब जज और उनका ऑफिस एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन कराने में सक्रिय रूप से शामिल था। जज फिलहाल रिटायरमेंट के बाद किसी पद पर हैं, जिस पर उन्हें चीफ जस्टिस ने नामित किया है।
चीफ जस्टिस तक पहुंची शिकायत!
दिल्ली और कोलकाता के सूत्रों ने पुष्टि की है कि महिला ने पिछले महीने चीफ जस्टिस को ब्योरेवार शिकायत भेजी है। हालांकि, उन्हें शीर्ष अदालत ने बताया है कि इसमें चीफ जस्टिस काफी कम मदद कर सकते हैं और वह कानून के तहत समुचित कदम उठा सकती हैं। इस बात की संभावना है कि शिकायतकर्ता पूर्व जज के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर याचिका दाखिल करेगी।
अपनी शिकायत में महिला ने उन दो मामलों का जिक्र किया, जब पूर्व जज ने उसे कथित तौर पर दो बार यौन रूप से प्रताड़ित किया था। जज के व्यवहार से खफा महिला ने अपनी इंटर्नशिप बीच में छोड़ दी थी। इस घटना के बारे में उसने अपने करीबी दोस्तों और परिवार को भी बताया था।
जब पूर्व जस्टिस गांगुली के खिलाफ कार्रवाई करने में शीर्ष अदालत ने तेजी दिखाई, उसके बाद यह महिला भी चीफ जस्टिस के पास अपनी शिकायत दर्ज कराने का साहस जुटा पाई।
अब तक कोई कार्रवाई नहीं!
बार-बार कोशिश करने के बाद भी चीफ जस्टिस ने टिप्पणी नहीं दी। हालांकि, एक सूत्र ने 5 दिसंबर के अदालत के फैसले के बारे में बताया, जिसमें साफ गया है कि इस अदालत के पूर्व जजों के खिलाफ होने वाली शिकायत सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन नहीं ले सकता। चीफ जस्टिस के इस पर कोई कार्रवाई न करने को लेकर यही बात कही गई है।
इस बारे में पूछने पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।
अदालत के फैसले पर उन्होंने कहा, "इस मामले को दो हिस्सों में बांट दीजिए। पहला सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट रिटायर्ड जजों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी, जब घटना रिटायरमेंट के बाद हो? और दूसरा यह क्या उस जज के खिलाफ कदम उठाया जाएगा, जो आज भले रिटायर हो, लेकिन घटना के वक्त सिटिंग रहा हो।"
इंदिरा जयसिंह ने जताई नाराजगी!
इंदिरा ने कहा, "मेरे हिसाब से अगर घटना के वक्त जज रिटायर नहीं था, तो अदालत का फैसला सही नहीं है। अधिकार क्षेत्र भूल जाइए, सुप्रीम कोर्ट में बतौइ इंटर्न काम करने वाली अगर किसी महिला के साथ किसी सिटिंग जज ने यौन शोषण किया है, तो कार्रवाई करना उनका कर्तव्य भी है और अधिकार भी। वे किसी भी तरह इस मामले से हाथ नहीं धो सकते।"
जस्टिस गांगुली मामले में 12 नवंबर को तीन जजों वाले जांच पैनल की रिपोर्ट पर फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा था, "क्योंकि इंटर्न सुप्रीम कोर्ट के रोल पर नहीं थी और संबंधित जज घटना की तारीख से पहले रिटायर हो चुके थे, ऐसे में शीर्ष अदालत की ओर से कोई और कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।"
ये हुआ था जस्टिस गांगुली वाले मामले में!
पिछले साल 6 नवंबर को जस्टिस गांगुली के साथ इंटर्नशिप करने वाली महिला वकील ने एक ब्लॉग के जरिए बताया था कि किस तरह दिसंबर 2012 में जज ने उसका यौन शोषण किया। जब घटना हुई, तो जज रिटायर हो चुके थे जबकि शिकायतकर्ता उनके साथ बतौर इंटर्न काम कर रही थी।
इस मामले की जांच करने वाले तीन जजों के पैनल के मुताबिक प्रथम दृष्टया ऐसा लगा कि जज का व्यवहार महिला के प्रति सही नहीं था।
इसके बाद कई दिन तक जस्टिस गांगुली पर पद छोड़ने का दबाव बना रहा, लेकिन वह शुरुआत में नहीं मान रहे थे। बाद में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, आरोपों से वह अब भी इनकार करते हैं। लेकिन उनका कहना है कि वह महिला के खिलाफ मानहानि का केस नहीं करेंगे।