केंद्र सरकार से निराश होने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 30 परिजनों ने उनकी गुमनामी से जुड़े रहस्य को उजागर करने के लिए प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मदद मांगी है। इस महान स्वतंत्रता सेनानी को आखिरी बार 17 अगस्त, 1945 को बैंकाक हवाई अड्डे पर देखा गया था।
नेताजी से जुड़े सभी गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए उनके परिजनों ने ममता को पत्र लिखा है कि नेताजी के योगदान को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री के सामने यह मामला रखना चाहिए।
नेताजी के पौत्र चंद्र कुमार बोस ने मंगलवार को इस पत्र को पत्रकारों के सामने पढ़ते हुए कहा कि ममता बनर्जी नेताजी की प्रबल प्रसंशक हैं इसलिए यह उचित होगा कि वे इस रहस्य को उजागर करने की मांग करें। वे इस अभियान को लेकर ममता की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नेताजी को लेकर अनेक कहानियां प्रचलित हैं। कोई कहता है कि वे ताईवान में हुई विमान दुर्घटना में मारे गए तो कोई कहता है कि वे गुमनामी बाबा के वेश में भारत में रहे। कोई कहता है कि उनकी मृत्यु रूस में हुई। लेकिन वास्तव में उनका क्या हुआ, इसका कोई प्रमाण नहीं है। हम सच्चाई जानना चाहते हैं।