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अन्ना को मोदी नहीं, भाजपा से है परहेज

Thu, 29 Aug 2013 08:27 PM IST
नई दिल्ली/वाशिंगटन/एजेंसी
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भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं बल्कि भाजपा से परहेज है।
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हजारे ने अमेरिका में कहा है कि अगर नरेंद्र मोदी भाजपा छोड़ दें तो उन्हें उनके नाम पर मुहर लगाने में खुशी होगी।

अमेरिकी अखबार ‘हफिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार हजारे ने 20 अगस्त को डेलावेयर में हिंदू मंदिर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय, विद्वानों, चिंतकों की एक बैठक में यह टिप्पणी की। दो हफ्तों की अमेरिका यात्रा के बाद हजारे बुधवार को भारत के लिए रवाना हुए।

डेलावेयर यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल पॉलिसी एंड अंडरस्टैंडिंग के फेलो मुक्तेदार खान ने अखबार की रिपोर्ट में लिखा है कि हजारे ने नरेंद्र मोदी पर मुहर नहीं लगाई।
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उन्हें राजनीतिक दलों पर भरोसा नहीं है और चूंकि मोदी राजनीतिक दल भाजपा के सदस्य हैं, ऐसे में वे उन पर मुहर नहीं लगा सकते।

खान ने लिखा है कि लेकिन जब उन पर मोदी को एक व्यक्ति विशेष के रूप में मुहर लगाने के लिए दबाव डाला गया तब उन्होंने कहा कि मोदी यदि भाजपा छोड़ देते हैं तो उन्हें उनके नाम पर मुहर लगाने में खुशी होगी।

जब पीटीआई ने अमेरिका में हजारे से संपर्क करने का प्रयास किया गया तब वे टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। डेलावेयर कार्यक्रम में प्रश्न-उत्तर सत्र के संचालक खान ने लिखा है कि हजारे जैसे सामाजिक कार्यकर्ता के लिए यह एक राजनीतिक उत्तर था।

खान ने लिखा है कि अन्ना हजारे मोदी के समर्थकों को नाराज किए बगैर ही मोदी पर मुहर लगाने के विषय से बाहर निकल जाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन मुझे शक हो रहा है कि उन्होंने मोदी की आलोचना नहीं कर हिंदू धर्मनिरपेक्षवादियों को नाराज कर दिया और मोदी पर मुहर नहीं लगाकर हिंदू राष्ट्रवादियों को निराश कर दिया।

अन्ना का यह कथित बयान मोदी पर उनके अन्य बयानों से काफी अलग है।

अन्ना को रामलीला मैदान जाने की जरूरत नहीं'
मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किरण बेदी का मानना है कि भ्रष्टाचार के विरोध में मुहिम छेड़ने वाले अन्ना हजारे के लिए फिर अपना आंदोलन शुरू करने के लिए रामलीला मैदान जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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बेदी ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इससे हजारे के साथ उनका मतभेद नहीं झलकता है। उन्होंने कहा, ‘वे और हजारे के अन्य सहयोगी उन्हें रामलीला मैदान में वापस नहीं जाने के वास्ते उन्हें मनाने की कोशिश में लगे हैं। इसकी एक अन्य वजह उनका स्वास्थ्य भी है।’
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