मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी और इस पर उठे बवाल के बाद माकपा विधायक अनीसुर रहमान पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के भी निशाने पर आ गए हैं।
अपनी पार्टी से निंदा झेलने के बाद शुक्रवार को रहमान को वरिष्ठ माकपा नेता बृंदा करात की नाराजगी का सामना करना पड़ा। रहमान के बयान को करात ने नृशंस और पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया। उन्होंने कहा कि माकपा इस तरह के बयान की निंदा करती है।
पार्टी ने रहमान पर सार्वजनिक पाबंदी लगा दी है और भविष्य में ऐसे बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। वहीं भाजपा ने भी बयान की निंदा की है। पार्टी प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि रहमान के बयान पर प्रकाश करात और सीताराम येचुरी को पार्टी का रुख स्पष्ट करना चाहिए।
वाम मोर्चा सरकार में मंत्री रहे रहमान ने बुधवार को उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार में राजनीतिक रैली के दौरान ममता द्वारा बलात्कार पीड़ित को आर्थिक सहायता देने की घोषणा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वहीं रहमान की अभद्र टिप्पणी पर संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी को तीन हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) अशोक गांगुली ने शुक्रवार को यहां कहा कि हमने इटाहार में अनीसुर रहमान द्वारा की गई टिप्पणी के संबंध में संज्ञान लेकर नोटिस जारी किया है। डीजीपी से मामले की पड़ताल कर तीन हफ्ते के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। उन्हें सीडी तथा अन्य संबंधित सामग्री एकत्रित करने का निर्देश भी दिया गया है।
बयान के टीवी चैनलों पर प्रसारण के बाद बवाल मच गया था। इस पर विधानसभा में माकपा के उपनेता रहमान ने माकपा के प्रदेश मुख्यालय पर बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में अपनी टिप्पणी के लिए खेद जताया। तृणमूल कांग्रेस ने रहमान के खिलाफ मानहानि का मामला दाखिल करने की चेतावनी दी और उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया।