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जानिए मोदी की उत्तराधिकारी के बारे में चौंकाने वाली बातें

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गुजरात में मोदी की कुर्सी संभालने जा रही आनन्दीबेन गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी। आइए जानते हैं मोदी की 73 वर्षीया उत्तराधिकारी आनन्दीबेन के जीवन के कुछ अनछुए पहलू।
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गुजरात की अफसरशाही में 'साहेब' यानी नरेंद्र मोदी के बाद 'बेन' यानी आनन्दीबेन की ही तूती बोलती है। नरेंद्र मोदी जब गुजरात से बाहर रहते हैं तो आनन्दीबेन की अगुआई वाला ग्रुप और मिनिस्टर ही प्रदेश संभालता है। आनन्दीबेन इस समय गुजरात में कई अहम पदों पर नियुक्त हैं। राजस्व, शहरी विकास, महिला एवं कल्याण विभाग और सड़क व इमारत विभाग शामिल हैं।

बॉएज स्कूल की कड़क गर्ल

कम ही लोगों को पता होगा कि आनन्दीबेन और नरेंद्र मोदी ने एक ही स्कूल से पढ़ाई की है।

आनन्दीबेन का जन्म 21 दिसंबर 1941 को मेहसाणा में हुआ। चौथी क्लास तक तो आनन्दीबेन लड़कियों के स्कूल में पढ़ी लेकिन पांचवी क्लास में पिता जेठाभाई ने उनका दाखिला विसनगर केएनएम स्कूल में करा दिया। दरअसल क्षेत्र में आगे की पढ़ाई के लिए जिले में लड़कियों का स्कूल नहीं था। 

आनन्दीबेन 700 लड़कों के स्कूल में एकमात्र लड़की थी। लेकिन आनन्दीबेन की हिम्मत थी कि पूरे स्कूल में उनकी प्रशंसा होती थी।

बेहतरीन एथलेटिक होने के चलते उन्हें मेहसाणा में वीरबाला अवार्ड से सम्मानित किया गया।

जुझारू और हिम्मती शिक्षिका

आनन्दीबेन की पहचान एक हिम्मती और जुझारू महिला के रूप में की जाती है। 1987 की बात है, आनन्दीबेन वडनगर के मोहिनीबा कन्या विद्यालय के छात्रों के साथ सरदार सरोवर बांध के पास पिकनिक पर गई थी। तभी दो छात्राएं पानी में डूबने लगीं।

आनन्दीबेन ने साहस का परिचय दिखाते हुए बांध में कूद कर दोनों छात्राओं को बाहर निकाल लिया। इस साहस और जुझारूपन के लिए उस समय आनन्दीबेन को खूब वाहवाही मिली और यहां तक कि खुद राज्यपाल ने आनन्दीबेन को सम्मानित किया।

मोदी लाए राजनीति में

आनन्दीबेन के पति मफतभाई (77) पेशे से मनोविज्ञान के प्रोफेसर हैं। मफतभाई भी दशकों से भाजपा में सक्रिय हैं। आनन्दीबेन को राजनीति में लाने का श्रेय भी नरेंद्र मोदी को दिया जा सकता है। जनसंघ के दिनों में जब मोदी को भाजपा इकाई में नियुक्त किया गया तो 37 साल के मफतभाई के मार्फत आनन्दीबेन की विचारधारा से काफी प्रभावित हुए।

कहा जाता है कि मोदी ने अन्य कार्यकर्तांओं के साथ मिलकर आनन्दीबेन को राजनीति में उतरने की सलाह दी लेकिन आनन्दीबेन ने हिचकिचाहट दिखाते हुए मना कर दिया। तब मफतभाई ने आनन्दीबेन को प्रोत्साहित किया और आनन्दीबेन भाजपा में शामिल हो गईं।

मोदी प्रदेश भाजपा के महासचिव बने तो आनन्दीबेन को महिला मोर्चा का प्रेजिडेंट पद मिला। कार्यशैली और मुखरता रंग लाई और 1994 में पार्टी की तरफ से उन्हें राज्यसभा भेजा गया। आनन्दीबेन केशुभाई पटेल और नरेंद्र मोदी दोनों की सरकारों में मंत्रीपद पर आसीन रहीं हैं।

मुश्किल घड़ी में रही मोदी के साथ

आनन्दीबेन आरंभ से लेकर अब तक मोदी के प्रति नि‌ष्ठावानों रही हैं। मोदी ने भी आनन्दीबेन पर हमेशा विश्वास जताया। केशुभाई पटेल के कार्यकाल में जब नरेंद्र मोदी संकटों में घिरे और समय उनके प्रतिकूल चल रहा था, तब भी आनन्दीबेन मोदी के प्रति निष्ठावान रही।

जानने वाले बताते हैं कि एक समय था मोदी पर निगरानी रखी जा रही थी, तब भी अकेली आनन्दीबेन ही थी जिन्हें मोदी के गुट में गिने जाने से कोई डर महसूस नहीं होता था। आनन्दीबेन हर मुश्किल में मोदी के साथ रहीं।

मोदी की कैबिनेट में रहते ह‌ुए आनन्दीबेन ने कई महत्वपूर्ण काम किए जिनमें स्कूल पंजीकरण योजना, भूमि सर्वेक्षण और भूमि रिकार्ड के डिजिटाइजेशन की योजना प्रमुख हैं।
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दस लोगों का परिवार और मास्टर्स की डिग्री

राजनीतिक सक्रियता कहें या विचारों की अनबन आनन्दीबेन का पति के साथ सामंजस्य नहीं बन पाया।

बताते हैं कि मफतभाई ने उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारी के साथ साथ पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। 1965 में जब आनन्दीबेन पति के साथ अहमदाबाद पहुंची तो उन्होंने मास्टर ऑफ साइंस की पढ़ाई करते हुए घर को भी संभाला।

उस वक्त मफतभाई का संयुक्त परिवार था और घर पर दस से ज्यादा लोग रहते थे। बच्चों की परवरिश के साथ साथ आनन्दीबेन ने मास्टर्स की पढ़ाई भी की और राजनीति के लिए भी वक्त निकाला।

करीब 15 साल पहले आनन्दीबेन का पति मफतभाई से तलाक हो चुका है। फिलहाल वो अपने बेटे संजय और बेटी अनार के साथ रहती हैं।

अनार इन दिनों गुजरात में एनजीओ संचालित कर रहीं हैं। खबर है कि मां के सहयोग से अनार गुजरात की सक्रिय राजनीति में जल्द ही पदार्पण कर सकती हैं।

पिछले दिनों मफतभाई पटेल के आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने की खबरें आई थी लेकिन बाद में खुद मफतभाई ने इरादा बदल लिया।
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