कृषि क्षेत्र की अवहेलना के वजह से न सिर्फ देश का किसान बदहाल है। बल्कि खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा की नई योजना से क्या बदलाव होंगे इस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह से एम संजय ने बातचीत की।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को ऐतिहासिक बताया जा रहा है। यह योजना भारतीय खेती और किसानों हित में कितनी कारगर है?
नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि खजाने पर भार पड़ने की चिंता के बजाय हमने किसानों के हित को सुरक्षित करने का प्रयास किया है। नई योजना के बाद किसानों को खेती में होने वाले नुकसान की चिंता नहीं रहेगी। किसान समृद्ध रहेगा तभी देश की खेती भी समृद्ध होगी। पिछली योजना में ढे़रों खामियां थीं। नई योजना में तमाम विशंगतियों को सुधारा गया है। अब किसानों का श्रम जाया नहीं जाएगा। फसल बर्बाद होने पर उसे पूरी रकम मिलेगी।
कृषि क्षेत्र की दुर्दशा के कारण खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। बल्कि तमाम लोग इस क्षेत्र से मुंह मोड़ रहे हैं। आए दिन किसान आत्म हत्या कर रहे हैं। खेती कैसे बनेगी मुनाफे का सौदा?
पीएम मोदी का मानना है कि खेती समृद्ध होगी तभी देश समृद्ध होगा। और खेती की समृद्धि के लिए किसानों का समृद्ध होना जरूरी है। इस प्रयास के तहत ही उन्होंने मंत्रालय का नाम बदलकर उसमें किसान कल्याण जोड़ा। केंद्र में हमारी सरकार बनने के बाद से जमीन की सेहत और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रमुख उपाय हुए हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड और प्रधानमंत्री सिंचाई योजना शुरू की गई है। अब किसानों के हित और खेती को सुरक्षित करने के लिए नई फसल बीमा योजना आई है। खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।
सूट-बूट और किसान विरोधी छवि का दाग धोने की कवायद!
फसल बीमा योजना को केंद्र सरकार की बन रही सूट-बूट और किसान विरोधी छवि का दाग धोने की कवायद माना जा रहा है?
केंद्र सरकार का मकसद स्पष्ट है। संसद में अपने पहले संबोधन में ही पीएम मोदी ने साफ कर दिया था कि उनके सरकार की प्रतिबद्धता किसान और गरीबों के प्रति है। यह योजना सियासी कवायद नहीं बल्कि पीएम मोदी की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। हमारी सरकार बनने के साथ ही 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पुरानी योजना को समाप्त करने की मांग की थी।
फसल बीमा योजना पहले से चली आ रही है, नई योजना पहले से बेहत्तर कैसे है?
देखिए, पहले की योजना में किसानों के लिए ज्यादा लगाओ और कम पाओ की स्थिति थी। मगर नई योजना में कम लगाओ ज्यादा पाओ की व्यवस्था की गई है। प्रीमियम की दर को 1.5 प्रतिशत से अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। रबी फसल के लिए किसानों को बीमा राशि का 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना पड़ेगा। तो खरीफ के लिए प्रीमियम की दर 2 प्रतिशत रखी गई है। वाणिज्यिक खेती के लिए प्रीमियम की दर 5 प्रतिशत है।
पहले की योजना में प्रीमियम की दर जोखिम के हिसाब से जिलावार तय होती थी। नई योजना में फसल बीमा प्रीमियम की दर देशभर में एक रखी गई है। तो बीमित राशि पर से तय सीमा का प्रावधान भी समाप्त किया गया है। जिससे किसानों को बीमा की पूरी रकम मिल सकेगी। वहीं आकलन का पैमाना क्षेत्रवार के बजाय खेत आधारित रखा गया है। जलभराव, भूस्खलन, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिस से होने वाले नुकसान को बीमा के दायरे में शामिल किया गया है।
क्या इस योजना का भी वही हाल होगा?
किसान का जीवन सुधारने के नाम पर पहले भी कई योजनाएं बनी हैं। लेकिन इनका हाल जस का तस है। इस योजना का हश्र भी वैसा ही तो नहीं होगा?
मुझे उम्मीद है कि योजना परवान चढ़ेगी। योजना को जीमन पर उतारने के लिए जनता की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। सरकार के जरिए बड़े स्तर पर योजना का प्रचार-प्रसार होगा। बावजूद उसके राज्य सरकारों का भी सकारात्मक सहयोग चाहिए। हमारा मानना है कि कोई भी संवेदनशील सरकार योजना को सफल बनाने से मुंह नहीं मोडेगी।
योजना को जमीन पर अंजाम देने के लिए सभी लेखपाल व पटवारी को स्मार्ट फोन दिए जाएंगे। ताकि वे तकनीक का इस्तेमाल कर जल्द रिपोर्ट दे सकें। वहीं फसल नुकसान के मामले में किसान को बीमा राशि का 25 प्रतिशत तुरंत मिलेगा। शेष राशि भी 90 दिन के भीतर उसके हाथ में रहेगी। अगले 2 से 3 साल में देश के 50 प्रतिशत से ज्यादा किसानों को योजना लाभ के दायरे में लाएंगे।