भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दिल्ली के सियासी दंगल में विपक्ष के साथ ही पार्टी के अंदर की चुनौतियों से भी दो-चार होना पड़ रहा है। दिल्ली भाजपा के लचर संगठन और नेताओं के असहयोग से निपटने की शाह की रणनीति काम नहीं कर पाई जिसके चलते शाह का चुनावी प्रबंधन जमीन पर नहीं उतर पाया।
चुनावी जंग के लिए बाहर से लाए गए नेता और कार्यकर्ता अपना अधिकांश समय पीआर में ही गंवा रहे हैं। भाजपा आलाकमान को इस बात की जानकारी मिली है कि बाहर से आए उसके ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता जमीन पर पार्टी को मजबूती देने के बजाए अपना निजी संपर्क बढ़ाने में जुटे हैं।
जिसके कारण शाह की रणनीति को जमीन नहीं मिल पाई। अब भाजपा की अंतिम रणनीति चुनाव के दिन पर टिकी है। प्रचार के अंतिम दौर में पूरी ताकत झोंकने के बाद पार्टी का अगला प्रयास वोट प्रबंधन पर है।