भाजपा के सांसद अब अपनी मर्जी से अपने कोटे की सांसद विकास निधि का उपयोग नहीं कर पाएंगे। सांसद की जगह पार्टी की जिला इकाई इस निधि के इस्तेमाल का अंतिम फैसला करेगी।
पार्टी की कमान संभालते ही शाह ने पार्टी सांसदों को इस आशय का फरमान जारी कर दिया है। दरअसल 16वीं लोकसभा में भाजपा में पहली बार लोकसभा पहुंचने वाले सांसदों की भरमार है।
पार्टी नेतृत्व को लगता है कि अनुभवहीनता के कारण नए सांसद इस निधि का दुरुपयोग कर पार्टी को विवाद में फंसा सकते हैं। इससे पहले 14वीं लोकसभा में कई सांसद इस निधि के इस्तेमाल में स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो चुके हैं।
यही कारण है कि भविष्य में इस तरह के संभावित विवादों को टालने के लिए पार्टी नेतृत्व ने सांसद निधि उपयोग के मामले में वाम दलों का फार्मूला अपनाया।
उल्लेखनीय है कि वामदलों के सांसदों की विकास निधि का फैसला भी सांसद के बदले संगठन करता आया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि शाह सांसदों के संबंध में जल्द ही कई और फरमान सुनाने वाले हैं।