गांधी परिवार का रुतबा ही कुछ ऐसा था कि पिछले दस साल में राहुल गांधी के वोटिंग के दिन कभी अमेठी में कदम रखने की जरूरत तक नहीं पड़ी। अमेठी के गांव से लेकर कस्बों तक में वोट पड़ते रहे। दिल्ली या प्रचार में कहीं और मसरूफ राहुल गांधी जीतते रहे।
लेकिन इस बार सियासी हवा ने रुख बदला, तो राहुल को भी बदलना पड़ा। दरअसल, मतदाता अपने अंदाज और मिजाज से इस बात का अहसास वोटिंग से पहले ही करा देते हैं कि उनकी नाराजगी का स्तर कैसा है?
लोकतंत्र की ताकत भी यही है कि देश का सबसे शक्तिशाली परिवार भी जब चुनाव लड़ता है, तो बहन को कई दिन गांव की धूल फांकनी पड़ती है और भाई को अपना 'लगाव' दिखाने खुद पहुंचना पड़ता है। लेकिन बुधवार को राहुल के साथ अमेठी में जो हुआ, वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।
स्थानीय लोगों ने उठाए राहुल पर सवाल
जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को अमेटी के बूथ दर बूथ घूम रहे थे, तो उनके बाहर उन्हें कई बार मतदाताओं के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार राहुल ने मतदान वाले दिन बूथ का दौरा किया।
और वाकये ऐसे पेश आए, जिससे राहुल की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है। चिलौली सिंहपुर बूथ पर 63 वर्षीय अंबिका सरन सिंह ने कहा, "चलो दस साल बाद देखने को तो मिला।" इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया, "मैं यहां आया तो हूं।" इस पर सिंह ने पलटवार किया, "आज तो आप यहां अपने स्वार्थ के लिए आए हैं।"
राहुल के जाने के बाद सिंह ने कहा, "मैं किसान हूं और पिछले 30 साल से कांग्रेस का कार्यकर्ता रहा हूं, लेकिन कांग्रेस ने पुराने कार्यकर्ताओं को हमेशा नजरअंदाज किया है।"
गुस्से में दिखे राहुल गांधी
फूल गांव बूथ पर और तल्खी दिखी। एक नौजवान परवेश शुक्ला ने राहुल गांधी की तरफ चिल्लाकर कहा, "भइया...सड़क पर झटका लगा कि नहीं।" राहुल ने नजरअंदाज किया, तो उसने दोबारा सवाल किया।
इस पर राहुल ने कहा, "भइया, आप जाओ भाजपा के लिए काम करो।" इस पर नौजवान ने शुक्रिया कहा और उसके साथ मौजूद लोगों ने 'हर हर मोदी' के नारे लगाने शुरू कर दिए और राहुल को वहां से निकलना पड़ा।
पहली बार वोट देने वाले नर सिंह बहादुर सिंह ने कहा, "मैंने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे परिवार ने ऐसा करने के लिए कहा था।"
हालांकि, कुछ राहत भी मिली
हालांकि, मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाताओं ने राहुल को कुछ राहत दी। अब्दुल मदीन ने कहा, "भइया आप हमारी तरफ से निश्चिंत रहिए। हम सब आपके साथ हैं।"
बाद में मीडियाकर्मियों से बातचीत में राहुल ने कहा, "उनके मन में सिर्फ मेरे परिवार के लिए गुस्सा नहीं है, बल्कि समूचे देश को लेकर नाराजगी है।" लोगों के सवाल उठाने पर उन्होंने कहा, "वे दूसरे राजनीतिक दल के लोग हैं।"
दरअसल, प्रियंका गांधी-नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग के कारण वाराणसी के बजाय कुछ दिनों के लिए सारी निगाह अमेठी पर टिक गई थी। और वोटिंग के दिन भी खूब ड्रामा देखने को मिला।
विरोधियों के जान फूंकने से मामला दिलचस्प
देश के राजनीतिक इतिहास में अमेठी पर गांधी परिवार का एकछत्र राज रहा है, लेकिन इस बार वहां कुछ कांग्रेस विरोधी संकेत जरूर मिले। ऐसा कोई पोल तो नहीं जिसमें यह कहा गया हो कि अमेठी में कोई खेल हो सकता है।
लेकिन पहले आम आदमी पार्टी और उसके बाद भाजपा की सक्रियता ने हवा में यह खबर जरूर फैला दी कि राहुल गांधी तेजी से वो पकड़ खोते जा रहे हैं, जो उन्होंने पिछले दस साल से अमेठी में बनाई हुई थी।
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुमार विश्वास और भाजपा की स्मृति ईरानी ने दावा किया कि वोटिंग के दिन राहुल का अमेठी में मौजूद रहना इस बात का संकेत है कि वो इस बार डरे हुए हैं।
मोदी ने भी लपका मुद्दा
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी भी इस मामले को भुनाने से नहीं चूके। दूसरी सीटों के प्रचार पर निकले मोदी ने कहा, "अब तक देश को अपनी जेब में समझने वालों को जनता ने ऐसा सबक सिखाया है कि वोटिंग के दिन दर-दर भटकना पड़ रहा है। अमेठी हाथ से सरक रही है।"
दरअसल, यह मामला जीत के मार्जिन से जुड़ा है। लाखों वोट से यह सीट जीतने वाले राहुल पिछले चुनावों में सभी 15 उम्मीदवारों की जमानत जब्त करा चुके हैं।
अमेठी राहुल को बचाएगी या डुबोएगी, इसका फैसला 16 मई को होगा। लेकिन ये संकेत जरूर मिल रहे हैं कि इस बार शायद राहुल गांधी का मार्जिन रिकॉर्ड स्तर तक नहीं पहुंच पाएगा।