फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डब्ल्यूटीओ में भारत के रुख से अमेरिका बौखलाया

Sun, 27 Jul 2014 08:02 AM IST
एजेंसी/जेनेवा
विज्ञापन
विज्ञापन
भारत ने विश्व व्यापार संगठन को स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने खाद्य सुरक्षा मुद्दे के स्थायी समाधन के बिना व्यापार सुधार करार (टीएफए) का अनुमोदन नहीं करेगा।
विज्ञापन


भारत के इस रुख से अमेरिका बौखला गया है और चेतावनी दे डाली है कि इससे वैश्विक स्तर पर व्यापार सुधार खतरे में पड़ सकता है। भारत ने कहा है कि पिछले सात महीने में खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से सरकारी खाद्यान्न भंडारण के मुद्दे पर कोई प्रगति नहीं हुई है।

खाद्यान्न भंडारण के लिए डब्ल्यूटीओ के नियमों में संशोधन भारत जैसे देश के लिए खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को लागू करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि अमेरिका ने भारत का सीधे नाम नहीं लिया है लेकिन कहा है कि इस रुख से व्यापार सुधार के प्रयास को झटका लगेगा।
विज्ञापन

अमेरिका ने उठाए भारत के रवैये पर सवाल

भारत ने इसके साथ ही गरीब देशों के लाखों लोगों के जीवनस्तर को प्रभावित करने वाले मुद्दों के समाधान पर जोर देते हुए जेनेवा में संपन्न दो दिन की आम परिषद की बैठक में कहा कि लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालना ठीक नहीं है।

भारत के इस रुख से विकसित देशों के लिए व्यापार सुधार संधि के क्रियान्वयन के अपने एजेंडे पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा। इसके कारण इस संधि का क्रियान्वयन एक और समय सीमा पर नहीं हो सकेगा। विश्व व्यापार संगठन को इस संधि को 31 जुलाई तक अनुमोदित करना है।

डब्ल्यूटीओ में भारतीय राजदूत अंजलि प्रसाद ने कहा, "हम इस संधि पर सदस्यों की चिंताओं को समझते हैं और उन्हें दूर करने के लिए मेरे प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि इसे खाद्य सुरक्षा मुद्दे के स्थायी समाधान तक टाला जाना चाहिए।"

उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि पिछले सात महीने में खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से सरकारी खाद्यान्न भंडारण के मुद्दे पर कोई प्रगति नहीं हुई है। खाद्यान्न भंडारण के लिए डब्ल्यूटीओ के नियमों में संशोधन भारत जैसे देश के लिए खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को लागू करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

भारत समझौते के पक्ष में नहीं

डब्ल्यूटीओ के मौजूदा नियमों के तहत खाद्यान्न सब्सिडी कुल खाद्यान्न उत्पादन के मूल्य का 10 फीसदी है। हालांकि इस सब्सिडी की गणना दो दशक पुराने मूल्य पर की जाती है।

भारत खाद्यान्न सब्सिडी की गणना के लिए आधार वर्ष 1986 में बदलाव की मांग कर रहा है। अमेरिका कृषि सब्सिडी के रूप में 120 अरब डॉलर देता है जबकि भारत सिर्फ 12 अरब डॉलर ही दे पा रहा है।

व्यापार सुधार की अंतिम संधि अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों को अधिक पसंद है। डब्ल्यूटीओ सदस्यों ने इसे पूरा कर दिया है लेकिन भारत की खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर एक भी बैठक नहीं हुई है।

विकसित देशों के समूहों ने भारत को चेताया

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे विकसित देश व्यापार सुधार संधि के अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं और गरीब अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं को अनदेखा कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया की अगुवाई वाले 25 देशों के समूह ने चेताया है कि इससे हटने का फैसला किसी के हित में नहीं होगा। इससे भविष्य की योजनाओं पर निर्णय करने की डब्ल्यूटीओ की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़ा होगा।

इसके अलावा इससे डब्ल्यूटीओ सदस्यों को इस संधि के क्रियान्वयन के लिए सक्षम बनाने की नई पहल भी बाधित होगी। ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व वाले इस समूह ने बयान में कहा है कि दोहा दौर की वार्ताओं के लिए बाली कार्य योजना की प्रगति की संभावनाओं का भी इससे रास्ता रूकेगा। इसके अलावा मंत्रियों ने बाली में जो फैसले किए हैं उन पर भी असर पड़ेगा।
विज्ञापन

क्या होगा असर?

रार की वजह
भारत खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर समझौता नहीं करना चाहता, जबकि अमेरिका समेत विकसित देशों के समूह का कहना है कि भारत जैसे देशों की ओर से इस पर नरमी दिखाए बगैर अगले दौर के व्यापार सुधार समझौतों को आगे बढ़ाना मुश्किल है।

क्या होगा असर?
भारत के इस रुख से विकसित देशों के लिए व्यापार सुधार संधि के क्रियान्वयन के अपने एजेंडे पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा। इसके कारण इस संधि का क्रियान्वयन एक और समय सीमा पर नहीं हो सकेगा। विश्व व्यापार संगठन को इस संधि को 31 जुलाई तक अनुमोदित करना है।

दूसरे को उपदेश
अमेरिका भारत पर कृषि सब्सिडी कम करने का दबाव बना रहा है। जबकि अमेरिका कृषि सब्सिडी के रूप में 120 अरब डॉलर देता है जबकि भारत सिर्फ 12 अरब डॉलर ही दे पा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें