लोकपाल के लिए जारी अन्ना हजारे के अनशन और चार विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार को देखते हुए केंद्र सरकार इस बार कोई गलती नहीं करना चाहती है।
इसलिए सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा में संशोधित लोकपाल विधेयक पेश किया। इस पर सपा सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया।
बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी लोकपाल विधेयक का समर्थन करेगी।
केंद्र सरकार सोमवार को विधेयक पर छह घंटे की चर्चा करा कर इसे पारित कराना चाहती है। सरकार के इस कदम को राजनीति में आम आदमी पार्टी (आप) की धमाकेदार एंट्री और इसके ठीक बाद समाजसेवी अन्ना हजारे का जनलोकपाल पारित कराने के लिए फिर से अनशन पर बैठने से उपजे दबाव का नतीजा माना जा रहा है।
हालांकि, पांच दिसंबर से शुरू हुए सत्र में जारी हंगामे के बीच इस विधेयक का पारित होना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा। वैसे भी सरकार की सहयोगी सपा ने इस बिल का खुल कर विरोध किया है। जबकि अन्य दलों ने विधेयक के समर्थन का भरोसा दिया है।
उल्लेखनीय है कि कई नाटकीय घटनाक्रमों का गवाह बन चुका यह बिल अन्ना के आंदोलन नरम पड़ने के साथ ही ठंडे बस्ते में चला गया था।