सीबीआई ने शनिवार को एंबुलेंस घोटाला मामले में जिकित्जा हेल्थकेयर लिमिटेड के मौजूदा निदेशकों के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की। राजस्थान की भाजपा सरकार की सिफारिश पर जांच एजेंसी ने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि कंपनी के मौजूदा निदेशकों श्वेता मंगल, नरेश जैन और रवि कृष्णा के घरों पर छापेमारी की गई।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जीवाड़ा), 468, 471 और 120बी के तहत लोक सेवकों सहित मुंबई और जयपुर स्थित निजी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। तकनीकी शर्तें जानबूझकर जोड़कर कंपनी के पक्ष में निविदा जारी करने में हुई कथित अनियमितता को लेकर मामला दर्ज किया गया है।
वर्ष 2009 में, जिकित्जा हेल्थकेयर कंपनी को राज्य में अस्पतालों या चिकित्सा केंद्र से दूर स्थित ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए चुना गया था। वर्ष 2015 में राज्य के ऑडिटर ने पाया कि सिर्फ कागजों में मौजूद जिकित्जा कंपनी को एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए पैसों का भुगतान किया गया।
ऑडिटर ने बताया कि सरकार को इन एंबुलेंसों के फर्जी चक्करों के फर्जी बिल भी थमा दिए गए। आरोप है कि यह पूरा घोटाला दस करोड़ से ज्यादा का है। जयपुर के मेयर और भाजपा नेता पंकज जोशी की शिकायत पर 31 जुलाई 2014 को शहर के अशोक नगर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
गहलोत, पायलट कार्ति चिदंबरम का भी नाम एफआईआर
एंबुलेंस घोटाले में राजस्थान सरकार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट समेत तत्कालीन केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि के बेटे रवि कृष्णा, तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का भी नाम शामिल है।
जिस वक्त जिकित्जा कपंनी को एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए चुना गया, उस वक्त गहलोत प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और कार्ति, पायलट तथा रवि कंपनी के निदेशक पद पर थे। इसके अलावा जिकित्जा हेल्थकेयर, इसके निदेशक श्वेता मंगल, तत्कालीन स्वास्थ्य राज्य मंत्री दुरु मिर्जा और तत्कालीन एनआरएचएम निदेशक को नामजद किया गया था।