प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) का उभरना राजनीति में एक अहम मोड़ है। साथ ही यह स्थापित राजनीतिक पार्टियों के लिए एक चुनौती भी है।
नोबेल विजेता ने कहा कि समाजसेवी अन्ना हजारे का इस व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन से दूर रहना बुद्धिमानीपूर्ण कदम नहीं था।
एक निजी न्यूज चैनल में बहस के दौरान सेन ने कहा कि अन्ना हजारे व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन में शामिल नहीं हुए, जोकि उनके हिसाब से बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं था। 'आप' ने आधारभूत मुद्दों को उठाकर आम जनता को एकजुट किया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना
देश में समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भी उन्होंने आलोचना की। उन्होंने कहा कि समलैंगिकता को अपराध करार देना अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा का उल्लंघन है।
सेन ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, यहां कुछ लोगों को हर तरह की छूट मिली हुई है और कुछ को नहीं। जब बात अल्पसंख्यकों चाहे धर्म या फिर समलैंगिक जैसे जीवनशैली अपनाने वाले लोगों के अधिकारों की हो तो नियम अलग हो जाते हैं। समलैंगिकता को अपराध घोषित करना अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का उल्लंघन ही है।
नारायण मूर्ति ने भी केजरीवाल को सराहा
इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने भी अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की सराहना की। उन्होंने कहा कि केजरीवाल की पार्टी ने दिखा दिया है कि यदि लोग चाहें तो बहुत कम पैसों में भी चुनाव जीते सकते हैं। आप एक नई पार्टी बनाकर भी शानदार सफलता हासिल कर सकते हैं।
मूर्ति ने कहा कि केजरीवाल ने देश के विभिन्न शहरों में रहने वाले लोगों को भरोसा और विश्वास दिलाया है कि वे भी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
''आप' की सफलता ने चौंकाया'
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अरुण शौरी ने 'आप' की सफलता को अन्य राजनीतिक पार्टियों के लिए चौंकाने वाली है। उन्होंने कहा कि स्थापित राजनीतिक पार्टियों से तंग आ चुकी जनता को आप में एक नया विकल्प दिखा है।
'आप' के चलते अब सभी को बेहतर उम्मीदवार खड़े करने पर मजबूर होना होगा। हालांकि शौरी ने कहा कि आप पार्टी की आर्थिक नीतियां प्रतिगामी है, जिससे कई तरह से आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचेगा।