नये विचारों को दुनिया हाथों-हाथ लेती है। यहीं से शुरू होती है कामयाबी की कहानी। दुनिया भर में हो रहे आर्थिक बदलाव और वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में अगर कामयाबी है तो उसके खतरे भी हैं।
इन्हीं विचारों को समेटे हुए कुछ चुनिंदा वीडियो ने गुरुवार को दिल्ली के आईआईसी सेंटर में अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था टेड की भारतीय इकाई टेड-एक्स लाइव के कार्यक्रम में प्रतिभिगियों में नई ऊर्जा का संचार किया।
इस मौके पर विश्व विख्यात वैज्ञानिक प्रो. यशपाल ने कहा, 'सीखना सबसे जरूरी है और असली मज़ा तो तभी आता है जब कुछ सीखने को मिलता है। जीवन में अनुभव जो सिखाता है, वह किताबों से नहीं मिल सकता।'
कार्यक्रम में 10 से 14 जून तक इडनबर्ग में आयोजित टेड की संवाद गोष्ठी से कुछ चुनिंदा वीडियो को दिखाया गया।
इनका मकसद लोगों में आधुनिक तकनीक, सकारात्मक मनोरंजन और नई विचारधारा को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में आए प्रतिभगियों ने बुलीइंग (धमकाना, किसी से जबरन अपनी बात मनवाना) विषय एक गर्मागरम बहस में हिस्सा भी लिया।
कार्यक्रम में दो सत्र में वीडियो दिखाए गए। पहले सत्र में मनी टॉक को केंद्र बिंदु में रखा गया। इसमें दुनियाभर में हो रहे आर्थिक बदलाव और उसकी स्थिति पर बात हुई।
वीडियो के माध्यम से वक्ताओं ने सामाजिक निवेश, रेटिंग एजेंसियों का दुनिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और आर्थिक खोज पर रोशनी डाली।
वक्ताओं ने बताया आज दुनियाभर में मध्यम वर्गीय परिवारों में ख़रीदने की क्षमता बढ़ी है। चीन का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने उसकी आर्थिक बढ़ोतरी को रेखांकित तो किया ही साथ ही उसके पीछे के खतरों को भी बताया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सामाजिक और तकनीकी रूप से कुछ नया करने वाले चुनिंदा वीडियो दिखाये गए जिसमें उद्यमी संजय दस्तूर और शिक्षाविद् सुगाता मित्रा के वीडियो को लोगों ने ख़ूब पसंद किया।
इसमें तकनीक और ज्ञान पर बारीकी से बात की गई थी। अंत में चार पंखों से चलने वाले रोबोट (क्वाड कोप्टस) ने सबको अपनी ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम के अंत में बुलीइंग विषय पर बहस का आयोजन हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर प्रो. यश पाल ने कहा कि प्रताड़ना, तिरस्कार और किसी के साथ भेदभाव करना बुलीइंग है।
वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा, दूसरों से बेहतर होने का नकाब ओढ़कर दूसरों पर अपनी इच्छाएं लादना बुलीइंग है। बच्चों को जागरूक करना जरूरी है तभी इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में आए युवाओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन से दुनियाभर में हो रहे नये प्रयोगों के बारे में जानने को मिलता है।
इस अवसर पर टेड-एक्स के ब्रांड अबेंसडर गौरव गुप्ता, यूनिसेफ की कम्यूनिकेशन ऑफिसर सोनिया सरकार भी मौजूद रहीं।
प्रतिभागियों ने सराहा
आज का यह कार्यक्रम बुहत अच्छा लगा। विषय काफी अच्छे और अलग थे। पहली बार मैं इस तरह के कार्यक्रम में शामिल हुआ। कार्यक्रम से यह सीख मिली कि जो भी काम करें, उसे मन लगाकर करें।--ध्रुव गोयल, उम्र-12 साल, दिल्ली
इस तरह के आयोजन बार-बार होने चाहिए। आज के कार्यक्रम से जाना कि दुनिया के किस तरह से नये-नये प्रयोग हो रहे हैं। मैं अमर उजाला को धन्यवाद देता हूँ कि उसने इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया।--अमोघ, उम्र-12 साल, गाजियाबाद