सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और कभी पार्टी के संकटमोचक रहे पूर्व महासचिव अमर सिंह के बीच फिर से दोस्ती की गांठ बंधने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि दोस्ती की इस नई कवायद से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुश नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक पटल पर आए एक अहम मोड़ से इस संकेत को बल मिलता है कि इन दोनों दिग्गज नेताओं के बीच संबंध फिर से पूर्व की तरह सामान्य हो सकते हैं।
दरअसल मुलायम सिंह के चाणक्य कहे जाने वाले सपा के पूर्व महासचिव अमर सिंह के खिलाफ चल रहे मनी लॉड्रिंग के सभी केसों को अखिलेश सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा से वापस ले लिया है। वहीं कानपुर पुलिस ने शुक्रवार को जिला जज ओपी वर्मा की अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल कर दी। साल 2009 में मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार ने उस समय सपा के महासचिव रहे अमर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया था।
अमर सिंह के खिलाफ करोड़ों रुपए की मनी लॉड्रिंग के केस वापस लेने के बाद उनके प्रति मुलायम सिंह के रुख में नरमी नजर आ रही है। हालांकि अमर सिंह के सपा में लौटने की राह उतनी आसान नहीं होगी, क्योंकि मुलायम के बेटे और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस कदम के खिलाफ माने जाते हैं।
इस संबंध में जब सपा के प्रवक्त्ता व सांसद मोहन सिंह से पूछा गया तो उन्होंने इससे इंकार नहीं किया। उन्होंने इसे सपा मुखिया के स्तर का मामला बताते हुए पल्ला झाड़ दिया।
उल्लेखनीय है कि फिल्म अभिनेत्री व सांसद जयाप्रदा के लिए अमर सिंह ने आजम खान, शिवपाल सिंह यादव और रामगोपाल यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उस वक्त अमर सिंह ने मुलायम और उनके परिवार को भी खूब भला बुरा कहा था। नतीजतन उनकी समाजवादी पार्टी से विदाई हो गई। बाद में अमर सिंह ने नई पार्टी बना ली थी। उनकी पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार भी खड़े किए लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पाई।
आज आलम ये है कि अमर सिंह के नजदीकी लोगों की पूरी फौज मुलायम और अखिलेश के साथ आ चुकी है। चाहे अमर सिंह की करीबी सांसद जया बच्चन हो या अभिनेता संजय दत्त और मनोज तिवारी। एक-एक करके सभी अमर सिंह से किनारे हो चुके है। ऐसी स्थिति में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने अगर अमर सिंह को वापस लाने का मन बना लिया है तो जाहिर तौर पर ये यूपी की सियासत में एक नया मोड़ होगा।