रिटेल में एफडीआई समेत केंद्र की कथित जनविरोधी नीतियों से नाराज तृणमूल
कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी का यूपीए-2 और सरकार से शुक्रवार को नाता
टूटना तय हो गया है।
यूपीए सरकार में शामिल तृणमूल के सभी छह मंत्री शुक्रवार को प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। डीजल मूल्य वृद्धि और रिटेल में
एफडीआई के मुद्दे पर सरकार के फैसला बदलने से इनकार के बाद बृहस्पतिवार को
कोलकाता में ममता ने यह ऐलान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार से समर्थन वापसी की चिट्ठी भी तृणमूल
कांग्रेस राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दे देगी। यह चिट्ठी लेकर शुक्रवार को
तृणमूल के मंत्री दिल्ली पहुंचेंगे। रेल मंत्री मुकुल राय ने इस्तीफा
सौंपने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने का वक्त भी मांगा है। ममता ने कोलकाता
में कहा कि सरकार से समर्थन वापसी का फैसला पहले ही किया जा चुका है।
मालूम हो कि ममता ने रिटेल में एफडीआई का फैसला वापस लेने, सब्सिडी वाले
रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या 24 करने और डीजल की कीमतों में तीन से चार
रुपये की कटौती करने की मांग की है। वहीं, सरकार ने साफ कह दिया है कि वह
अपने फैसलों से पीछे हटने वाली नहीं है, क्योंकि यह फैसले काफी सोच समझ कर
किए गए हैं। 19 सांसदों वाली तृणमूल के यूपीए सरकार में एक कैबिनेट मंत्री
समेत छह मंत्री हैं। ममता ने दो टूक कहा कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं
है। उन्होंने इन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि वह कांग्रेस हाईकमान से
बातचीत के लिए दिल्ली जा रही हैं।