कोयला ब्लॉक आवंटन की ताजा एफआईआर पर मचे हड़कंप के बीच सीबीआई ने साफ किया है कि उद्योगपति कुमारमंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख के खिलाफ एफआईआर को वापस लिए जाने का कयास लगाना बिल्कुल गलत और निराधार है।
सीबीआई ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से प्रश्नावली भेज कर पूछताछ करने का भी कोई आधार नहीं है।
इधर सीबीआई मंगलवार को सील बंद लिफाफे में इस मामले की कुल 19 स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी।
सीबीआई प्रवक्ता कंचन प्रसाद ने कहा कि कोयला घोटाले की जांच चल रही है। इससे पहले किसी तरह का अंदाज लगाना उचित नहीं।
कुछ अखबारों में खबर छपी थी कि सीबीआई कोयला घोटाले की ताजा एफआईआर को बंद करने पर विचार कर रही है। साथ ही इस मामले में प्रधानमंत्री से प्रश्नावली भेज कर पूछताछ की जाएगी।
सीबीआई के मुताबिक मंगलवार को दायर होने वाली 19 स्टेटस रिपोर्ट में 13 उन एफआईआर पर होगी जो 2006 से 2009 तक के ब्लॉक आवंटन मामलों से जुड़ा है।
दो रिपोर्ट घोटाले से जुड़े गायब फाइलों में दायर प्रिलिमनरी रिपोर्ट (पीआर) और तीन अन्य पीई (प्राथमिक जांच) से संबंधित है। एक स्टेटस रिपोर्ट सरकारी और निजी कंपनियों को साझा ब्लॉक देने संबंधी पीई से जुड़ा है।
इसी पीई के आधार पर बिड़ला उनकी, कंपनी और पारिख के खिलाफ ताजा एफआईआर दर्ज की गई है।
इस एफआईआर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर उठ रही उंगली के चलते प्रधानमंत्री कार्यालय को अपनी सफाई देनी पड़ी है।
प्रसाद से यह पूछा गया कि क्या पीएमओ के अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। इस पर उन्होंने कहा कि सीबीआई हर पहलू का गहराई से पड़ताल करेगी।
ओडिशा में हिंडाल्को को तालाबीरा कोयला खदानों के आवंटन के सिलसिले में कुमार मंगलम बिड़ला और पीसी पारिख की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है।
सीबीआई की एफआईआर में कहा गया कि स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में हिंडाल्को को वैध आधार पर कोयला खदान का आवंटन करने से इनकार कर दिया गया था।
लेकिन बाद में ऊपर से आदेश आने पर खदानों का आवंटन कर दिया गया था।