श्रीनगर में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक में घाटी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे तो उसमें अलकायदा की धमकी और घुसपैठ का मुद्दा छाया रहेगा।
हाल ही में अलकायदा ने एक सीडी जारी कर धमकी दी थी कि अफगानिस्तान से आतंकियों का जत्था जल्द ही कश्मीर का रुख करेगा। सीडी में कश्मीरियों से अपील की गई कि वह भारत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए तैयार रहें।
हालांकि इस सीडी के जारी होने के बाद सेना और जम्मू-कश्मीर के तमाम उच्च पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि वे अलकायदा की किसी भी धमकी से निपटने को तैयार हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मीटिंग में यह मुद्दा प्रमुख रहेगा।
टॉप एजेंडे में रहेगी घाटी की सुरक्षा
सुरक्षा एजेंसियां पहले ही आशंका जता चुकी हैं कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के लौट जाने के बाद तालिबानी कश्मीर घाटी का रुख कर सकते हैं। साथ ही इससे निपटने की सेना की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री के दौरे में राजनीतिक नेताओं से मिलने की बजाय सिर्फ घाटी की सुरक्षा व्यवस्था टाप एजेंडे में होगी।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार घाटी के दौरे में पहुंच रहे नरेंद्र मोदी चार जुलाई को कोई राजनीतिक रैली न कर श्रीनगर के बदामीबाग स्थित 15 कोर के हेडक्वार्टर में लगभग तीन घंटे सुरक्षा मीटिंग करेंगे। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा आर्मी और एयरफोर्स के शीर्ष अधिकारी, डीजीपी के राजेंद्रा, मुख्य सचिव इकबाल खांडे और घाटी में तैनात सेना की विभिन्न कोर के जीओसी, अर्द्धसैनिक बलों के उच्चाधिकारी, इंटेलिजेंस के अफसर उपस्थित रहेंगे।
बैठक में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए उठाए कदमों की भी समीक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री रियासत की सुरक्षा व्यवस्था पर जेएंडके के राज्यपाल एनएन वोहरा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ अलग बैठक करेंगे।
प्रधानमंत्री दौरे का हमेशा हुआ विरोध
समय-समय पर जब भी देश के प्रधानमंत्री कश्मीर दौरे पर पहुंचे तो अलगाववादियों ने उनका विरोध किया। नरेंद्र मोदी के चार जुलाई के दौरे पर अलगाववादियों ने कश्मीर बंद का आह्वान किया है।
इससे पहले पिछले साल जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कश्मीर दौरे पर पहुंचे थे तो उसके एक दिन पहले आतंकियों ने सेना की कानवाई पर हमला किया था, जिसमें आठ सैनिक शहीद हो गए थे।
मोदी के दौरे से पहले सुरक्षा बलों ने श्रीनगर को पूरी तरह से घेर लिया है। नई दिल्ली से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के 80 कमांडो श्रीनगर पहुंच चुके हैं।