बॉस आप लोग झूठ क्यों बोलते हैं? अरे जो दिल में हो वो खुलकर कहें। हमारे जैसे बहुत गरीब पत्रकारों का भला होगा। जब भी हमारी सर्वे करने वाली टीम आपकी पसंद-नापसंद से जुड़े सवालों के साथ आपके पास पहुँचती है, आप बड़े चौड़े होकर कहते हैं- देखें जी हम तो बस ऐसी खबर पढ़ना-सुनना-देखना चाहते हैं, जिनसे हमें पता चले दुनिया में क्या हो रहा है, उनसे हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा। साथ में विज्ञान, सेहत, टेक्नॉलॉजी की भी खबरें हों तो क्या कहने।
उसके बाद आप यह भी कहते हैं कि टीवी न्यूज चैनलों के पास तो दिखाने को कुछ होता ही नहीं है, एंकर चिल्ताते रहते हैं, चार लोग बैठकर एक ही बात चार तरह से कह रहे होते हैं। फिर आप घर पहुँचते हैं और जैसे ही हाथ में रिमोट आया कि "बेबी डॉल मैं सोने दी" की कहानियां जिस चैनल पर आ रही होती हैं वहीं रुक जाते हैं। भाड़ में गया अमेरिका-ईरान परमाणु समझौता, जलवायु परिवर्तन, अमेरिकी चुनाव और आइसिस।
एक ही हफ्ते में सर्वे करनेवाली टीम की रिपोर्ट कूड़े में पहुँचती है और चैनल पर शुरू हो जाती है तिलस्मी बाबा, करामाती बिल्ली, डॉन का प्यार, धोनी का चमत्कार। एंकर और एंकरनी फिर से चीखना-चिल्लाना शुरू कर देते हैं। पता नहीं चल पाता है कि खबर अच्छी है या बुरी। सवाल पूछते हैं तो पता ही नहीं चलता कि पूछ रहे हैं या बता रहे हैं। आप सोच रहे होंगे, साल अभी शुरू ही हुआ है मैं इतना भन्नाया हुआ क्यों हूँ। बॉस आपके झूठ के चक्कर में सात सौ गरीब पत्रकारों की नौकरी जा रही है। ढाई साल पहले उन्होंने अल जजीरा अमेरिका के लिए काम करना शुरू किया था। 30 अप्रैल को अपनी आखिरी पगार लेंगे क्योंकि चैनल बंद हो रहा है।
बिल क्लिंटन की प्रेम कहानी देखेंगे?
वैसे तो बंद होने की एक बड़ी वजह यह भी कही जा रही है चैनल का नाम है अल जजीरा और अमेरिका में बहुत सारे हैं जिन्हें अल जजीरा और अल कायदा एक ही जैसे सुनाई देते हैं। लेकिन उससे भी बड़ी वजह हैं आप। चैनल खोलने से पहले बेचारों ने सर्वे करवाया कि आप क्या देखना चाहेंगे। 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समाचार, ऐसी खबरें जो आम लोगों से जुड़ी हों, जिनमें पूरे अमेरिका की बात हो रही हो, सिर्फ वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को में रहने वाले अमेरिका की नहीं। आपने कहा कि दूसरे चैनलों में इसकी बड़ी कमी महसूस करते हैं आप।
बस क्या था, चैनल ने ताबड़तोड़ वैसी ही खबरें दिखानी शुरू कर दीं। अफ्रीका की गरीबी, लातिनी अमेरिका के ड्रग वॉर, मेक्सिको से अमेरिका में घुसने वालों की मजबूरी, इसराइल और मध्य-पूर्व की जंग, सीरिया की बेहाली- यानी मेरे एक मित्र का मुहावरा उधार लूँ, तो उनके शब्दों में ज्यादातर "रोता आया मरते की खबर लाया" वाली खबरें। सर्वे में 60 प्रतिशत लोग ऐसी खबरों की मांग कर रहे थे। टीआरपी में पता चला कुल 28,000 लोग चैनल देख रहे थे।
अब अगर आप खुलकर कह देते कि भाई साहब किम कारदाशियां की कहानियां और बेहतर तरीके से दिखाओ। हिलेरी क्लिंटन की पॉलिसी नहीं बिल क्लिंटन की प्रेम कहानियों पर एक सिरीज दिखाओ, मिशेल ओबामा के डिजाइनर कपड़ों पर हर हफ्ते एक एपिसोड हो। मार-धाड़, सेक्स-रोमांस से भरपूर खबरें हों, तो क्या चला जाता आपका। सात सौ लोगों की नौकरियां तो नहीं जाती।
अमेरिका में बंद होगा अल जजीरा
तो मुझे आप सच-सच बता दें। पब्लिकली नहीं तो मेरे ट्विटर हैंडल @brajup पर ही बता दें क्योंकि कड़ाके की ठंड में मैं इस महीने के आखिर में आयोवा जाऊंगा, फिर एक हफ्ते में न्यू हैंपशायर जाऊंगा क्योंकि इन दोनों जगहों से अमेरिकी चुनावी की औपचारिक तौर पर शुरुआत होगी- रिपब्लिकंस और डेमोक्रेट्स अपने-अपने उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
आप अगर सुनेंगे, देखेंगे, पढ़ेंगे तो आपके लिए 24/7 खबरें पहुंचाने में लगा रहूँगा। अगर नहीं तो मैं इस ठंड में ही सही कैनेडा का टिकट कटवाऊं। सनी लियोनी वहीं पैदा हुई थीं, उनके घर के बाहर तंबू लगाकर उनके बचपन से लेकर अब तक की एक-एक कहानी आपके सामने साल भर परोसता रहूँगा। और बैकग्राउंड में तस्वीरें वही, जिन्हें देखकर आपकी उंगलियां रिमोट से चिपक जाती हैं। आखिर नौकरी तो करनी है न बॉस।
वैसे भी सुना है एक जाने-माने संपादक, जिनकी मैं तहे-दिल से इज्जत करता हूं, इन दिनों लियोनी जी के साथ वॉक और टॉक दोनों ही करने जा रहे हैं दिल्ली की ताजा-ताजा साफ हुई हवाओं में। उन्होंने आपसे कुछ सुना होगा तभी तो। तो मैंने क्या बिगाड़ा है। मुझे भी अपनी दिल की बात बता ही डालें, मैं भी सोने की चमक से शायद चमक जाऊँ।