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अखिलेश के मंत्री ने दिया ऐसा बयान कि सब रह गए भौंचक्के

Thu, 25 Dec 2014 11:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
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उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद की निगाह में विकलांग परिवार और समाज के लिए बोझ हैं। वह बुधवार को जिले में समाजवादी पेंशन परिचय पत्र वितरण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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समारोह में मंच से उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनानी शुरू की। इस बीच वह विकलांगों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को गिनाने लगे। फिर बोले कि विकलांग परिवार और समाज के लिए बोझ बने हैं। यह सुनते ही वहां मौजूद अधिकारी एवं कर्मचारी बगले झांकने लगे। तभी मंच पर मौजूद एक अधिकारी ने इशारा किया। मंत्री को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने लगे हाथ सफाई भी दे डाली। कहा कि उनके कहने का मतलब है कि विकलांगों को कोई भार न समझे, इसलिए उनकी सरकार ने नाबालिग विकलांग के परिजनों को समाजवादी पेंशन से लाभान्वित करने का निर्णय लिया है।

मंत्री के इस बयान की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय विकलांग संघ के अध्यक्ष और सपा सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री अमरजीत सिंह जनसेवक ने विरोध शुरू कर दिया। साफ कहा कि विकलांगों के बारे में ऐसी बात करने वाले अच्छे इंसान नहीं हो सकते हैं। जनसेवक ने भी मंत्री के बयान पर उसी अंदाज में जवाब दिया। कहा कि विकलांगों को समाज का भार कहने वाले खुद मानसिक विकलांग हैं।
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ठगी में फंसे पूर्व सहकारिता मंत्री व उनका बेटा

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रदेश के सहकारिता मंत्री रहे अरुण कुमार सिंह मुन्ना ठगी के मामले में फंस गए हैं। पूर्व सहकारिता मंत्री और उनके बेटे पर मेडिकल कालेज में दाखिला कराने के नाम पर पांच लाख रुपया ठगने का आरोप है। इस मामले में अधिवक्ता ने पिता-पुत्र के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फतेहपुर के वर्मा चौराहा निवासी अधिवक्ता रमाकांत बाजपेई ने सदर कोतवाली में दी तहरीर में आरोप लगाया कि जौनपुर जिले के मुंगरा बादशाहपुर निवासी पूर्व मंत्री अरुण कुमार सिंह ऊर्फ मुन्ना सिंह पुत्र प्रताप बहादुर से उसने अपने बेटे का मेडिकल में दाखिला कराने को कहा था। सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने के  एवज में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह ने सालभर पहले पांच लाख रुपये मांगे थे। यह पैसा उनके बेटे नीरज सिंह के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते में दो किश्तों में जमा किया। एक बार तीन लाख 75 हजार और दूसरी बार एक लाख 25 हजार रुपये जमा किए। सत्र बीत जाने के बाद भी बेटे का एडमिशन नहीं हुआ तो उसने रुपये वापस मांगे। इस पर पूर्व मंत्री व उनके बेटे ने पैसा लौटाने के इनकार कर दिया। साथ ही फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजवाने की धमकी दी।

अधिवक्ता का आरोप है कि अब उसे जान से मरवाने की धमकी भी दी जा रही है। कोतवाली पुलिस ने अधिवक्ता की तहरीर पर पूर्व मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ षड़यंत्र, ठगी, धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गौरतलब रहे कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में अरुण सिंह सहकारिता मंत्री रहने के अलावा 2004 में प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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