प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की चुप्पी के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिल्म पीके का विरोध कर रही जमात को करारा राजनीतिक जवाब दिया है।
उत्तर प्रदेश में आमिर खान अभिनीत यह फिल्म टेक्स फ्री कर दी गई है। अखिलेश यादव ने फिल्म के संदेश की तारीफ भी की है। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय के ऑफिसियल टि्वटर एकाउंट से कहा गया है कि पीके के संदेश से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिल्म को मनोरंजन कर मुक्त करने का फैसला किया है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा में पितृपुरुष का दर्जा प्राप्त वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी पीके की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने पीके देखने के बाद अधिक से अधिक लोगों को फिल्म देखने की अपील भी की थी।
देश के कई हिस्सों में पीके का विरोध
विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि फिल्म में हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया गया है।
हालांकि फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी, अभिनेता आमिर खान समेत कई समीक्षक भी कह चुके हैं कि फिल्म में किसी भी धर्म या किसी व्यक्ति की आस्था का मजाक नहीं उड़ाया गया है, बल्कि धर्म के नाम पर आडंबर और अंधविश्वास बढ़ाने वालों की पोल खोलने का प्रयास भी किया गया है।
फिल्म के विषय के लिए आमिर खान पर निजी हमले तक किए गए। पीके के विरोधियों ने कहा कि आमिर खान ने मुसलमान होने के कारण हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया है।
ऐसे आरोपों की सफाई में आमिर खान ने कहा कि फिल्म के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा, निर्देशक राजकुमार हिरानी, पटकथा लेखक अभिजीत जोशी हिंदू है। फिल्म निर्माण से जुड़े 90 फीसदी सदस्य हिंदू हैं।
केंद्र ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास नहीं किया
आमिर खान की सफाई के बाद भी फिल्म का विरोध किया जा रहा है। विरोधी संगठनों ने देश के कई हिस्सों में थियेटरों में घुसकर फिल्म मे पोस्टर फाड़े हैं। आमिर खान और अनुष्का शर्मा के पुतले भी जलाए गए हैं।
फिल्म का विरोध कर रहे संगठन स्वयं को हिंदू धर्म का प्रतिनिधि बता रहे हैं और फिल्म पर प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं। प्रतिबंध की मांग पर सेंसर बोर्ड इन्हें अपनी दो टूक सुना चुका है।
सेंसर बोर्ड की चेयरमैन लीला सैमसन कह चुकी हैं कि फिल्म रीलिज हो चुकी है, इसलिए इसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसे प्रदर्शनकारियों को हतोत्साहित करने के लिए कतई प्रयास नहीं किया है।
अखिलेश का फैसला करारा राजनीतिक जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत भाजपा के तमाम नेताओं ने पीके के विरोध पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि टीवी चैनलों पर भाजपा समर्थक कई प्रवक्ताओं ने पीके के कई दृश्यों पर अपत्ति जरूर जता दी।
सरकार और सत्ताधारी पार्टी की उहापोह के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का फैसला फिल्म का विरोध कर रहे लोगों के लिए ठोस जवाब माना जा रहा है।
फिल्म 200 करोड़ रुपए से अधिक कमा चुकी है, लेकिन अखिलेश यादव के फैसले के बाद इसे देखने वालों की संख्या फिर बढ़ सकती है।
अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला हुआ तेज
जानकारों का मानना है कि पिछले चंद महीनों में अभिव्यक्ति की आजादी पर कट्टरपंथी संगठनों का हमला अधिक तेज हुआ है। ऐसे संगठन विरोध के नए तरीके अपना रहे हैं।
विरोध के लिए ये पुराने मुद्दों को भी हवा देने से नहीं चूक रहे हैं। पिछले शुक्रवार तमिलनाडु में कट्टरपंथी संगठनों ने तमिल उपन्यास 'माथोरूबागान' की प्रतियां जलाईं थीं। आरोप था कि उपन्यास हिंदू धर्म की भवनाएं आहत कर रहा है और इस पर प्रतिबंध की मांग की गई थी।
पेरुमल मुरुगन का यह उपन्यास 2010 में प्रकाशित हुआ था। प्रकाशन के लगभग चार साल बाद उपन्यास के विरोध पर आश्चर्य जताया गया। विरोध के बाद भी प्रकाशक ने उपन्यास वापस लेने से मना कर दिया।
कट्टरपंथी संगठनों के विरोध के कारण फरवरी में पेंग्विन प्रकाशन ने अमेरिकी इंडोलॉजिस्ट वेंडी डॉनिगर की किताब 'द हिंदूः अल्टरनेटिव हिस्ट्री' को वापस ले लिया था।