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मंत्रियों को हटाकर अखिलेश ने चली ये सियासी चाल

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उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल से तय हो गया है कि सपा ने नई टीम के साथ विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर ली है। हालांकि, इतने बड़े परिवर्तन से मेरठ और आसपास के जिले अछूते रहे। इससे माना जा रहा है कि सियासी अहमियत को देखते हुए वेस्ट यूपी को एक-दो मंत्री और मिल सकते हैं।
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मेरठ और आसपास के जिलों में अभी मंत्रिमंडल में शाहिद मंजूर और बिजनौर से मूलचंद चौहान का कद पार्टी ने बरकार रखा है। अब नई टीम में आशु मलिक, मदन चौहान और उमर उली खां के शामिल होने की भी चर्चा है। वहीं, संभावना यह भी है कि चितरंजन स्वरूप और राजेंद्र राणा के निधन के बाद खाली सीटों पर एकाध नाम और भी शामिल हो सकता है।

वेस्ट यूपी में मेरठ और आसपास के जिलों में राज्य मंत्रिमंडल में शाहिद मंजूर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला तो बिजनौर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर को भी जगह दी गई। लेकिन, मुजफ्फरनगर दंगों के बाद विभिन्न समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए सभी जिलों में निकायों और निगमों में पद देकर पश्चिम के नेताओं का कद बढ़ाया गया। मुस्लिमों को साधने के लिए आजम खां को मेरठ और मुजफ्फरनगर का पहले ही प्रभारी मंत्री बना दिया गया था।
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आखिर सरकार ने क्यों छीनी लालबत्ती

गुर्जर वोटों के हिसाब से जहां पूर्व सांसद सुरेंद्र नागर को जोड़ा गया तो मंत्री रामसकल गुर्जर को भी अहम जिम्मेदारियां दी गईं। इसके बाद भी लोकसभा चुनावों में पश्चिम से भाजपा की आंधी की शुरुआत हुई तो पूरे प्रदेश में चली। लोकसभा चुनावों के बाद जब लालबत्तियां छीनी गईं, तो मेरठ के कई नेताओं सहित आसपास के सभी जिलों के नेता इसकी जद में आए।

हालांकि, इसके बाद नेताओं को अलग-अलग मौके पर फिर से समायोजित कर दिया गया। पश्चिम में सपा के पास परंपरागत यादव वोटर नहीं हैं। ऐसे में मुस्लिमों के साथ अलग-अलग जातिगत समीकरणों से सपा पद देती रही है।

चितरंजन स्वरूप के बाद वैश्य कोटे की एक सीट खाली होने के कारण बिजनौर की विधायक रुचि वीरा के साथ दबी जुबान में एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल के समर्थक भी दावा कर रहे हैं। दोनों को ही आजम खां का करीबी माना जाता है।
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अब किस-किसको मिलेगा मंत्री पद

ठाकुर वर्ग की सीट पर गढ़ सीट के विधायक मदन चौहान के साथ-साथ धौलाना विधायक धर्मेश तोमर भी एक दावेदार हैं। हालांकि, मूलरूप से मेरठ के रहने वाले मदन चौहान ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। सपा उनका फायदा कई जिलों में लेना चाहेगी। आशु मलिक भी मुरादनगर के रहने वाले हैं और सहारनपुर सहित पश्चिम के कई जिलों में सक्रिय हैं। इसलिए उन्हें भी पश्चिम के कोटे में ही शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा नगीना विधायक मनोज पारस लगातार मंत्रिमंडल में जगह बनाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। वहीं, हस्तिनापुर विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि के साथ सिवालखास विधायक गुलाम मोहम्मद भी लगातार मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दरअसल, सपा इस क्षेत्र में ज्यादा प्रयोग करने के बजाय अलग-अलग जातियों के नेताओं को समायोजित कर सुरक्षित और सधी चाल ही चलना चाहती है।

ऐसे में देखने वाली बात यह भी होगी कि क्या शाहिद मंजूर और मूलचंद चौहान जैसे मंत्रियों को कोई नई या बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी या फिर कद्दावर नेता आजम खां को इन जिलों में और ज्यादा सक्रिय करने के साथ कुछ और चेहरों के साथ सपा विधानसभा चुनावों में जाएगी।
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