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गजबः अंगूर के बाद अब केले से भी बनेगी शराब

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महाराष्ट्र में अंगूर, जामुन और करौंदे के  बाद अब केले से भी शराब (वाइन) बनाई जाएगी। राज्य सरकार जल्द ही केले से वाइन बनाने के प्रकल्प की मंजूरी देने पर विचार कर रही है। राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने विधान परिषद में इसकी घोषणा की।
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उन्होंने कहा है कि राज्य में केले के बढ़ते उत्पादन और उससे मिल रहे भाव को देखते हुए शीघ्र ही यह निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में केले की अधिक खेती मुनाफे का सौदा हो सकती है।

महाराष्ट्र में करीब 82 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की फसल उगाई जाती है, जिससे प्रतिवर्ष तकरीबन 45 से 50 टन केले का उत्पादन होता है। महाराष्ट्र के खानदेश (भुसावल, जलगांव आदि जिले) में प्रमुखता से केले की खेती होती है।
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बाजार में मिल रहे अच्छे भाव को देखते हुए अब पश्चिम महाराष्ट्र के सतारा, सांगली और कोल्हापुर में भी केले का उत्पादन शुरू हो गया है। औरंगाबाद में बीयर इंडस्ट्री तो नासिक में वाइन इंडस्ट्री है।
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आम के रस से भी वाइन के उत्पादन का हो चुका है प्रयोग

इसके अलावा कई जगहों पर वाइन बनाने के  कॉटेज भी हैं, इसलिए समझा जा रहा है कि औरंगाबाद और नासिक में केले से वाइन के  उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। हालांकि सरकार में सहयोगी शिवसेना की विधायक नीलम गोन्हे ने इस पर आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि फलों से वाइन बनाने की योजना को प्रोत्साहन मिलने से कहीं ऐसा न हो कि प्रगतिशील महाराष्ट्र, मद्यराष्ट्र बन जाए। इस पर, कृषि मंत्री खडसे ने जोर देकर कहा है कि अंगूर के अलावा अन्य किसानों को भी विकल्प देने की जरूरत है। ऐसे व्यापार के लिए सरकार सात करोड़ रुपए का आवंटन भी करेगी।

जामुन और करौंदे की वाइन कामर्शियल दर पर नहीं ली जाती लेकिन केले की वाइन की बिक्री कामर्शियल दर पर होने की संभावना है। इससे जहां केला उत्पादक किसानों को कामर्शियल भाव मिल सकेगा वहीं वाइन के शौकीनों को नई वैरायटी की शराब उपलब्ध होगी।

इससे पहले महाराष्ट्र में दापोली स्थित बालासाहेब सावंत कृषि विश्वविद्यालय में आम के रस से भी वाइन के उत्पादन का प्रयोग किया जा चुका है लेकिन, यह वाइन खुले बाजार में नहीं आ सकी। बताया गया कि वाइनरी की अनुमति न मिलने से आम से वाइन बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
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