विदेश यात्रा से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ही नहीं संगठन के कामकाज की भी सुध लेंगे। सियासत के मंझे खिलाड़ी बन चुके पीएम मोदी को अहसास है कि लंबी इंनिंग खेलने के लिए संगठन का चुस्त-दुरूस्त रहना जरूरी है। इसलिए सरकार के साथ संगठन में भी जोश भरने का जिम्मा वे स्वयं संभाले हुए हैं।
मोदी के संगठन प्रेम का ही यह असर है कि वे जहां भी सरकार की योजनाओं का आगाज करने जाते हैं। वहां संगठन के नेताओं से मेलजोल करना नहीं भूलते। नवंबर के अंत में पीएम सरकारी योजनाओं को लांच करने के लिए पूर्वोत्तर की तीन दिवसिय यात्रा पर जाने वाले हैं।
इस दौरान मोदी ने त्रिपुरा, असम और नागालैंड के नेताओं के साथ अलग-अलग दिन सीधे संवाद का कार्यक्रम बनाया है। अपने करीबी अमित शाह को अध्यक्ष पद की कमान दिलवाने के भी मोदी की पैनी नजर संगठन के कामकाज पर भी बनी हुई है।
स्वदेश लौटने के तुरंत बाद पीएम मोदी सरकार के कामकाज के साथ संगठन के गतिविधियों की भी जानकारी लेंगे। इसके मद्देनजर देशभर में संगठन के कामकाज का मूल्यांकन करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 22 नवंबर को दिल्ली में सभी प्रदेश अध्यक्षों और राज्यों के प्रभारियों की एक अहम बैठक बुलाई है।