जीतनराम मांझी की बिहार के मुख्यमंत्री पद से विदाई तय हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू अध्यक्ष शरद यादव और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बीच मांझी को हटाने पर सहमति बन गई है।
खास तौर से नीतीश का मानना है कि मांझी भाजपा के इशारे पर जदयू और राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए लगातार विवादास्पद बयान दे रहे हैं। तीनों नेताओं की बैठक में मकर संक्रांति के बाद राजद और जदयू के विलय पर भी सहमति बन गई है।
हालांकि, इनकी इच्छा है कि जनता परिवार से जुडे़ सभी दल एकसाथ विलय की प्रक्रिया शुरू करें। इसके लिए मकर संक्रांति के बाद जनता परिवार की एक बड़ी बैठक होगी। उल्लेखनीय है कि नीतीश ने बृहस्पतिवार को जदयू और राजद के विलय के साथ-साथ मांझी के भविष्य पर लालू और शरद के साथ चर्चा की। जदयू सूत्रों के मुताबिक, मांझी की विदाई तय है। इसके लिए अब जदयू राजद नेतृत्व को सही समय का इंतजार है।
नीतीश की मांझी के खिलाफ नाराजगी और बढ़ गई
नीतीश-लालू और शरद तीनों नेताओं का मानना है कि मांझी भाजपा के इशारे पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसलिए मांझी सत्ता संभालने के कुछ दिनों के बाद से लगातार पार्टी और सरकार की फजीहत कराने वाला बयान दे रहे हैं।
नीतीश की मांझी के खिलाफ नाराजगी तब और बढ़ गई, जब दो दिन पहले मांझी ने नौकरशाही में व्यापक फेरबदल के दौरान नीतीश के पसंदीदा अधिकारियों के पर कतर दिए। चूंकि मांझी महादलित हैं, इसलिए उन्हें हटाने के बाद इस वर्ग में गलत राजनीतिक संदेश न जाए इसके लिए अब ठोस रणनीति तैयार की जा रही है।
हालांकि, लालू प्रसाद यादव कुछ महीने पूर्व से ही मांझी को हटाए जाने के पक्ष में थे। जदयू के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, मांझी भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। उनका इरादा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जदयू छोड़कर भाजपा का दामन थामने का है। इस आशय की भनक मिलते ही राजद और जदयू नेतृत्व में उनकी विदाई की पटकथा लिखनी शुरू कर दी थी। उक्त नेता के मुताबिक, मांझी को हटाने का फैसला ठोस रणनीति तैयार होने के तत्काल बाद लिया जाएगा।