कांग्रेस से सीधी लड़ाई में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है। इस हार के बाद भाजपा फिरसे राममंदिर और धारा 370 पर वापस लौट सकती है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कोशिश करेगी कि चुनाव राहुल बनाम मोदी हो। इन राज्यों में 40 हार वाली सीटों पर कांग्रेस आगे हो चुकी है। इस आधार पर लोकसभा चुनाव में सहयोगियों को संगठित करने में आसानी होगी। साथ में राहुल गांधी की स्वीकार्यता बढ़ेगी। राहुल अब मोदी के खिलाफ बने गुस्से को देशभर में भुनाने की कोशिश करेंगे।
वहीं हार के बाद भाजपा अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है। 2014 में 23 दलों के साथ चुनाव में उतरी भाजपा से 11 दल नाता तोड़ चुके हैं। इन चुनावों में हार के बाद भाजपा अब सहयोगियों को साथ रखने और नए सहयोगी जोड़ने के लिए नरम होगी। भाजपा आज से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर, धारा-370, कॉमन सिविल कोड को लेकर निर्णायक फैसले करने की सोचेगी। लोकसभा में एक बार फिर भाजपा अपने इन प्रमुख मुद्दों पर वापस जा सकती है।
कांग्रेस को पुरानी असफलताओं के लिए कोसने के अलावा अपनी उपलब्धियों को सामने लाने का प्रयास करेगी। क्योंकि, इस बार कांग्रेस को कोसने का दांव सही नहीं रहा। राहुल ने रफाल सौदे में भ्रष्टाचार, महंगाई, कर्जमाफी, संवैधानिक पदों से छेड़छाड़, तानाशाही, बेरोजगारी, अराजकता, महंगाई को मुद्दा बनाया। इससे सफलता भी मिली। आम चुनाव में 'मोदी हटाओ' के एजेंडे के साथ ही राहुल के नेतृत्व में महागठबंधन बन सकता है।