पूरे मानसून सत्र को ‘सूखा’ बना डालने वाला रिटेल में एफडीआई का मुद्दा शीतकालीन सत्र के पहले दिन भी गर्माया रहा। नतीजा यह कि नए सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। बृहस्पतिवार को भाजपा व लेफ्ट एफडीआई पर वोटिंग कराने के प्रावधान के तहत चर्चा कराने के लिए अड़ी रहीं, लेकिन सरकार नहीं मानी। लोकतंत्र के मंदिर में आगे भी इसी गतिरोध की आशंका है। वैसे सरकार ने रास्ता निकालने की उम्मीद में सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
शीतकालीन सत्र का शुभारंभ इतना हंगामेदार हुआ कि दोनों सदनों की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। मैदान में ताल ठोकते हुए भाजपा और वाम दलों ने तर्क रखा कि जब अटल बिहारी सरकार वाल्को के विनिवेश पर लोकसभा में नियम 184 के तहत चर्चा करा सकती है, तो मनमोहन सरकार इसी नियम के तहत चर्चा कराने से क्यों भाग रही है।
इस मसले पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश होने से पहले ही गिर गया। पार्टी प्रस्ताव को पेश करने के लिए आवश्यक 50 सांसदों का समर्थन भी नहीं जुटा सकी। भाजपा और माकपा ने कहा कि प्रस्ताव अगर पेश होकर गिरता तो विपक्ष सरकार को घेरने का मौका खो देता। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने साफ कर दिया कि एनडीए इस मसले पर चर्चा के बाद वोटिंग चाहता है।
हालांकि एनडीए संयोजक शरद यादव ने कहा कि चर्चा नियम 184 के तहत हो या नियम 193 के तहत, इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। सत्ता पक्ष व विपक्ष के अड़ियल रुख से शुक्रवार को भी संसद चलने के आसार बहुत कम हैं। दरअसल, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के सही संख्या बल का जायजा लेने के साथ सपा-बसपा की असलियत भी सामने लाने की कोशिश में है, लेकिन सरकार के रुख से साफ है कि मामला आसानी से सुलझने वाला नहीं है।