हाइकोर्ट में एक ऐसे वकील को न्यायाधीश नियुक्त किया जाने वाला था जिसका एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन से रिश्ता रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले हाइकोर्ट कोलेजियम ने आतंकी संगठन से संबंध रखने वाले एक वकील के नाम की हाइकोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश कर दी थी।
इस शख्स का नाम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री, राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट में भी भेजा गया था लेकिन वहां भी उसकी हकीकत सामने न आ सकी।
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के न्यायाधीशों ने उक्त वकील के नाम पर फैसला लेने से पहले उसके चरित्र की जांच के लिए न केवल संबंधित हाइकोर्ट से इस संबंध में जानकारी ली बल्कि शीर्ष न्यायाधीशों से भी बात की।
सारी जांच के बावजूद भी उस व्यक्ति का नाम हाइकोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर छह महीने पहले आगे बढ़ा दिया गया।
पीएमओ पहुंचकर सच आया सामने
वकील का सच तब सामने आया जब खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने मामले की जांच की।
जब यह नाम प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा तो वहां पर अन्य नामों सहित इसकी भी छानबीन करने का आदेश दिया गया। आईबी को इसका काम सौंपा गया।
आईबी की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि नामित वकील का आतंकी संगठन से लिंक है।
पीएमओ से यह सूचना कोलेजियम को दी गई, जिसने तुरंत बाद उसका नाम हाइकोर्ट के न्यायाधीश के पद से वापस ले लिया।