प्रधानमंत्री पद के दौड़ में फिर से शामिल हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के समर्थन में पार्टी के भीतर कई आवाजें उठने लगीं हैं।
पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिंह ने भी लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना है।
जदयू के विरोध के चलते नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के मुद्दे पर चुप्पी साध बैठा पार्टी आलाकमन अब नई मुश्किल में फंसता दिख रहा है।
हालांकि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने लोकसभा चुनावा से पहले प्रधानमंत्री पद पर हो रही बहस को बेमानी बताया है।
संघ ने कहा है ये बहस कांग्रेस की राहुल बचाओ रणनीति का हिस्सा है। भाजपा में प्रधानमंत्री पद के लिए उठापटक का आभास पैदा करने से कांग्रेस को ही फायदा है।
क्या कह रहे हैं आडवाणी समर्थक
सांप्रादायिक छवि के कारण नरेंद्र मोदी का विरोध कर रही जदयू ने शनिवार को प्रधानमंत्री पद के लिए लालकृष्ण आडवाणी का नाम सामने किया।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और अरुण जेटली से हुई मुलाकात में संकेतों में आडवाणी की उम्मीदवारी का समर्थन किया।
बिहार सरकार में कृषि मंत्री व जदयू नेता नरेंद्र सिंह ने भी एक टीवी साक्षात्कार में लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया।
इसके बाद भाजपा के भीतर से भी आडवाणी की उम्मीदवारी के समर्थन में आवाजें उठने लगीं।
वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने एक अंग्रेजी दैनिक को दिए साक्षात्कार में कहा कि आडवाणी अगर तैयार हो जाते हैं तो उन्हें राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आडवाणी की उम्मीदवारी का समर्थन करते हुए उन्हें पार्टी का सबसे बड़ा नेता बताया।
उन्होंने कहा, 'हमारे पास कई प्रतिभाशाली नेता हैं लेकिन आडवाणी हमारे सबसे बड़े नेता हैं।'
संघ की राय
हालांकि संघ ने न अब तक आडवाणी की उम्मीदवारी का समर्थन किया है और न उसे खारिज किया है।
प्रधानमंत्री पद के लिए हो रही बहस में हस्तक्षेप करते हुए संघ ने अपने मुखपत्र पांचजन्य में इसे कांग्रेस की प्रायोजित बहस कहा है।
संघ का कहना है कि ये बहस ये आभास पैदा करने कि लिए की जा रही है मानो भाजपा में प्रधानमंत्री पद के लिए उठापटक हो रही हो।
पांचजन्य के लेख में आडवाणी को भाजपा का शिखर पुरुष बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि आडवाणी आज जिस मुकाम पर खड़े हैं वहां किसी भी पद (प्रधानमंत्री पद) के वे अकांक्षी नहीं है। वे सभी पदों से ऊपर हैं।
हालांकि संघ और भाजपा के नेताओं बयानों के बाद ऐसा लगने लगा है कि प्रधानमंत्री पद के लिए छिड़ी बहस फिलहाल राहुल बनाम मोदी न होकर मोदी बनाम आडवाणी होने जा रही है।