6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए ढांचा ध्वंस मामले में शनिवार को विशेष अदालत में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष सीबीआई ने 31वें गवाह के रूप में प्रेस फोटोग्राफर नैय्यर जैदी को पेश किया।
गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा (इग्जामिनेशन इन चीफ) में बताया कि उसने 6 दिसंबर 92 को लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी को मंच पर देखा था।
गवाह से बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी जिरह पूरी कर ली। गवाही पूरी होने पर विशेष मजिस्ट्रेट गोपाल तिवारी ने सुनवाई की अगली तारीख 10 दिसंबर तय कर दी। इस दिन सीबीआई अगला गवाह विशेष कोर्ट में पेश करेगी।
सुबह जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित विशेष कोर्ट में अभियोजन पक्ष सीबीआई ने 31वें गवाह के रूप में लखनऊ निवासी एक समाचार पत्र के प्रेस फोटोग्राफर नैय्यर जैदी को पेश किया।
गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा के बयान में बताया कि वह सन् 1992 में एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड कंपनी में काम करता था। कंपनी के तीन अखबार हिंदी में नवजीवन, अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड और उर्दू में कौमी आवाज निकलते थे।
वह कौमी आवाज से जुड़ा था। गवाह ने बताया कि उसे कंपनी ने 1 दिसंबर से 6 दिसंबर 92 तक के लिए अयोध्या कवरेज करने भेजा था। वह सुबह 10.30 बजे पहुंचा तो देखा कि सांकेतिक कार सेवा चल रही थी। कारसेवक आ-जा रहे थे।
उसने विवादित स्थल और भीड़भाड़ की फोटो खींची थी। गवाह ने बताया कि जब वह फोटो खींच रहा था, तब भाषण हो रहे थे। उसने मंच पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी को देखा था। बाकी और लोगों को पहचान नहीं पाया था।
गवाह ने 7 दिसंबर 92 को प्रकाशित नेशनल हेराल्ड के प्रथम व अंतिम पृष्ठ पर व उर्दू अखबार कौमी आवाज के प्रथम पृष्ठ पर छपी फोटो देखकर बताया कि वह फोटो उसी ने खींची थी।
मुख्य परीक्षा पूरी होने पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने जिरह शुरू की। एक सवाल के जवाब में गवाह ने बताया कि उसका बयान सीबीआई के विवेचक ने लिया था।
गवाह ने बताया कि उसने टूटे हुए विवादित स्थल की फोटो नहीं ली थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक पी. चक्रवर्ती व अधिवक्ता एमएम हक मौजूद रहे।