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मेरठ: गैंगरेप-धर्मांतरण पीड़िता को मिली एक बड़ी जीत

Thu, 14 Aug 2014 12:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ के खरखौदा में युवती से गैंगरेप कर उसे धर्मांतरण के दलदल में फंसाने के आरोपी बचने की जुगत में खुद ही फंसते जा रहे हैं। बुधवार को युवती की एक बड़ी जीत यह हुई कि सनाउल्ला को पुलिस ने उसे हापुड़ और मुजफ्फरनगर ले जाने और धर्मांतरण का फर्जी शपथपत्र बनवाने का दोषी मान लिया।
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उसके खिलाफ पहले उन्हीं धाराओं में आरोप लगाए गए हैं, जिनमें युवती ने केस दर्ज कराया था। इस सनसनीखेज प्रकरण की पटकथा का मुख्य आरोपी सनाउल्ला ही है। अब युवती ही कोर्ट में अपना पक्ष बेहतर तरीके से रखेगी कि उसे ये आरोपी किस नीयत से लेकर गए थे।

बुधवार को एसएसपी ओंकार सिंह की प्रेस वार्ता में इस पूरे प्रकरण में सनाउल्ला की भूमिका स्पष्ट हो गई। वहीं युवती के उन दावों को भी बल मिला है, जिसके सहारे वह न्याय की गुहार लगा रही है। युवती की दर्दनाक दास्तां का अहम पहलू भी यही है। उसका मानसिक और शारीरिक शोषण करने के साथ उसे बिना परिजनों की अनुमति के अनाम जगह ले जाया गया और धर्म बदलने पर मजबूर किया गया।
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प्रत्येक आरोपी कहीं न कहीं दोषी: एसएसपी

एसएसपी का कहना है कि अभी विवेचना चल रही है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सामने आ रहे तथ्य और पकड़े गए आरोपियों के दावों का सत्यापन किया जा रहा है। अहम बात यही है कि इस केस से जुड़ा प्रत्येक आरोपी कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप से दोषी जरूर है। आरोपियों को यह अधिकार नहीं है कि किसी की बेटी की भावनाओं से इस तरह खिलवाड़ करें। पीड़ित युवती को उसके परिजनों की अनुमति के बिना ले जाना और इस तरह का कृत्य करना कम गंभीर बात नहीं है। इन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।

लोकेशन ही कोई पुख्ता प्रमाण नहीं:
एसएसपी का कहना है कि 29 जून को युवती और आरोपियों के मोबाइल फोन की लोकेशन गांव में ही मिली है। जबकि 29 जुलाई के बाद और दो अगस्त के बीच लोकेशन हापुड़ और मुजफ्फरनगर में। पुलिस दोनों फ्रंट पर काम कर रही है।

आरोपियों की मोबाइल की लोकेशन मौके पर न मिलने से यह नहीं माना जा सकता कि मौका-ए-वारदात पर कोई नहीं था। यह भी संभव है कि युवती या आरोपियों ने अपने मोबाइल गांव में ही छोड़ दिए हों। पुलिस सभी तथ्यों को क्रॉस चेक कर रही है।

जेल भेजा गया सनाउल्ला

सनाउल्ला ने भले ही यह दावा किया कि वह 28 जून से दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में भर्ती था। इन दावों और प्रमाणों की गहनता से जांच चल रही है।

बकौल एसएसपी, हमने किसी आरोपी को क्लीन चिट नहीं दी है। युवती के साथ जो कुछ हुआ, उसके प्रति पुलिस को पूरी सहानुभूति है। पुलिस भी चाहती है कि उसके साथ अन्याय न हो। दोषी को कानून के हिसाब से माकूल सजा दिलाई जाएगी।

एसएसपी के अनुसार आरोपी सनाउल्ला को गहन पूछताछ के बाद धारा 363, 366, 376 (घ), 295(क), 420, 467, 468, 471, 342, 354 आईपीसी में गिरफ्तार करते हुए कोर्ट में पेश किया गया। उसे न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इससे पूर्व गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ भी इन्हीं धाराओं में चार्ज बनाए गए हैं।

झूठ का पुलिंदा है सनाउल्ला का दावा: पीड़िता

गैंगरेप और धर्मांतरण के मुख्य आरोपी सनाउल्ला के दावों को पीड़िता और उसके परिजनों ने झूठ का पुलिंदा करार दिया है। आरोप लगाया है कि सनाउल्ला ने खुद को अस्पताल में भर्ती कराने संबंधी फर्जी कागज पेश किए हैं। पुलिस भी उसके इस फर्जीवाड़े को सही ठहरा रही है।

परिजनों ने पुलिस के उन दावों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें सनाउल्ला को 28 जून से एक जुलाई के बीच नई दिल्ली के अस्पताल में भर्ती होना बताया गया।

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि 29 जून को ग्राम प्रधान नवाब, सनाउल्ला और शानू उसकी पुत्री को हापुड़ के मदरसे में लेकर गए थे। जहां सनाउल्ला ने छेड़छाड़ की तथा नवाब और शानू ने बलात्कार किया। बाद में उसे तथा इकलौते भाई को जान से मारने की धमकी देकर घर भेज दिया गया। दोबारा 23 जुलाई को अपहरण के बाद पीड़िता को गढ़ में एक मदरसे में रखा गया। 30 जुलाई को जबरन धर्म परिवर्तन और ऑपरेशन कराया गया था।

'मैं नहीं जानती क्या हुआ'

पीड़िता ने बताया कि उसे लगातार नशे के इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। बेहोशी में होने के कारण उसे अस्पताल के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि उसे कहां भर्ती कराया गया। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी सनाउल्ला को सियासी सपोर्ट मिल रहा है। इसके जरिए ही उसने दिल्ली के अस्पताल के फर्जी कागजात तैयार करा लिए।

रिकॉर्ड गायब हुआ:
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सनाउल्ला गांव के मदरसे का भी संचालक है। जब मामला प्रकाश में आया तो मदरसे से संबंधित रजिस्टरों और कागजातों को भी गायब करा दिया। पीड़ित ने शानू की गिरफ्तारी और मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।

यह हाफिज कौन है:
पीड़िता के पिता द्वारा खरखौदा थाने पर नवाब, सनाउल्ला, उसकी पत्नी, निशात पुत्री हशमत और हाफिज निवासी हापुड़ के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। चार अज्ञात लोगों में पुलिस कलीम, शानू, गुल सनव्वर और वकील अहमद को गिरफ्तार कर चुकी है। नवीन का नाम फर्जी नोटरी करने में सामने आया है। लेकिन हापुड़ के मदरसे के हाफिज का खुलासे में कोई जिक्र नहीं आ रहा है। पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर रही है कि यह हाफिज कौन है। यदि सनाउल्ला ही है तो युवती ने उसके अलावा हाफिज को क्यों नामजद किया। पुलिस भी बुधवार को इस मामले में अब केवल शानू और नवीन को ही वांटेड बता रही है। लेकिन हाफिज का कहीं जिक्र नहीं किया जा रहा।
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बड़ा सवाल: आखिर कहां था सनाउल्ला

युवती से गैंगरेप और धर्मांतरण के आरोपी सनाउल्ला की गिरफ्तारी का भी गजब का मैनेजमेंट रहा। सड़क से संसद तक मामला गूंजा। लेकिन सनाउल्ला इससे बेखबर रहा। वास्तव में वह खुद को बेगुनाह मानता है तो क्यों सामने नहीं आया। क्यों नहीं अपने अस्पताल में भर्ती होने का दावा किया? इनाम घोषित होने और कुर्की की तलवार लटकने के बाद ही क्यों उसने गिरफ्तारी का नाटक रचा। सवाल यह भी है कि क्या वह मेरठ में ही छिपा रहा। पुलिस का मुखबिर तंत्र भी उसे ढूंढ नहीं सका।

तीन अगस्त को यह प्रकरण सामने आने पर पुलिस ने पहले जो गिरफ्तारियां कीं, वही कामयाब रहीं। उसके बाद हुए खुलासे पर सवाल खड़े होने लगे। पहले कलीम की गिरफ्तारी हुई। लेकिन उसे मीडिया के सामने पेश नहीं किया गया। सच्चाई तो पुलिस और पीड़िता ही जानती है। यदि कलीम से सीधी बात होती तो कई नई जानकारी और सही बात सामने आतीं। कलीम का युवती से क्या संबंध था और किसके कहने पर रिकॉर्ड में उसने युवती को अपनी पत्नी लिखवाया, यह तो वही जानता था। समझा यही गया कि वह इस प्रकरण का मोहरा था। पुलिस ने अपने हिसाब से उसकी बातों को सामने रख दिया।
   
बुधवार को जब मुख्य आरोपी सनाउल्ला की गिरफ्तारी हुई तो इस बार भी उसे दिल का मरीज बताकर मीडिया से दूर रखा गया। मीडिया उससे सच्चाई जानना चाहती थी। चर्चा रही कि सनाउल्ला खुद मीडिया से मिलकर पक्ष रखना चाहता था। लेकिन पुलिस ने इसकी मंजूरी नहीं दी और उसे जेल भेज दिया।

उठ रहे ये सवाल:
सवाल यही खड़े हो रहे हैं कि जब सनाउल्ला खुद को पाक साफ बता रहा है तो तीन अगस्त को ही सामने आकर उसने क्यों अपनी सफाई पेश नहीं की। वह इस दिन का इंतजार क्यों करता रहा कि मामला ठंडा होने पर चुपचाप पुलिस से सेटिंग कर जेल चला जाएगा। क्यों उसने खुद पर पांच हजार का इनाम घोषित कराया और सीआरपीसी की धारा 82 की कार्यवाही शुरू कराई। पुलिस से भी सवाल है कि क्या सनाउल्ला वास्तव में मेरठ से गिरफ्तार हुआ। हां तो पुलिस का मुखबिर तंत्र क्यों उसे पहले क्यों नहीं ढूंढ़ पाया।
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