यूपी के गजरौला में गांव अफजलपुर लूट के अभिषेक ग्रेवाल का शव अमेरिका के शिकागो शहर से जल्द गजरौला आने की उम्मीद बंध गई है। अमर उजाला द्वारा मामला उठाने पर सांसद कंवर सिंह तंवर की गुजारिश पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रक्रिया तेज कराने का आश्वासन दिया है।
गुरुवार से शव को यहां लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मालूम हो कि 21 अक्तूबर को अभिषेक की संदिग्ध परिस्थितियो में अमेरिका में मौत हो गई थी, लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से परिजन शव भारत नहीं ला पा रहे थे।
रजबपुर के नेहरू स्मारक इंटर कालेज में शिक्षक जयप्रकाश सिंह ग्रेवाल निवासी गांव अफजलपुर लूट का बेटा अभिषेक अमेरिका के शिकागो शहर में टीसीएस कंपनी में मैनेजर था। वहां संदिग्ध परिस्थितियों में 21 अक्तूबर को उसकी मौत हो गई थी।
विदेश मंत्री से की बात
अभिषेक का शव कमरे में बंद मिला था। इसके बाद से परिजन शव भारत लाने के लिए अमेरिका
की कागजी खानापूर्ति के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन आठ दिन से अधिक होने
के बाद भी शव भारत नहीं लाया जा सका है।
इसके लिए दस्तावेज अधूरे बताए जा
रहे हैं। इधर, माता-पिता और पत्नी उसका चेहरा देखने को तड़प रहे हैं।
परिवार के दर्द को अमर उजाला ने 28 अक्तूबर के अंक में प्रमुखता से
प्रकाशित किया था। खबर पढ़ने के बाद भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर ने परिजनों
से संपर्क साधा और विदेश मंत्रालय के साथ विदेश मंत्री से बात की।
इस पर
विदेश मंत्री ने उन्हें इसकी प्रक्रिया तेज कराने का आश्वासन दिया है।
बताया कि, गुरुवार से अभिषेक का शव लाने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। शव दो
तीन दिन में अमरोहा आ जाएगा।
अमेरिका से मेरे बेटे का शव भी मंगा दें
अभिषेक के पिता जयप्रकाश का कहना है कि पाकिस्तान में सालों से फंसी गीता को केंद्र सरकार सकुशल वापस ले आई है, मेरे बेटे का तो अमेरिका में शव है, इसे ज्यादा दिन नहीं रखा जा सकता है, शव को जल्दी से जल्दी सरकार भारत मंगा दे, पूरा परिवार अंतिम बार चेहरा देखने को व्याकुल है।
पत्नी रेनू का रोते-रोते बुरा हाल है। मां भी अपने बेटे के गम में फफक फफक कर रो रही है। अभिषेक के परिवार की नींद उड़ी हुई है। दिन में ढांढ़स बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है।
यहां दिन है तो अमेरिका में उस वक्त रात होती है, ऐसे में रात होने पर अमेरिका पुलिस, टीसीएस कंपनियों के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करना पड़ता है, फोन करने की प्रक्रिया के चलते रातभर कोई नहीं सो पाता। इससे पूरे परिवार की नींद उड़ी हुई है।