शहर के सेक्टर-4 से बृहस्पतिवार को 6 साल के मासूम का अपहरण आरोपी जितेंद्र ने 10 लाख रुपये की फिरौती मांगने के लिए किया।
आरोपी के सिर पर 7 लाख रुपये का कर्जा है और फिरौती की रकम से वह कर्ज उतारना चाहता था। जितेंद्र अपनी 10 साल की बेटी को स्कूल छोड़ने और लेने जाता था।
तभी उसने सेक्टर-4 में प्रथम को स्कूल बस से उतरकर बड़ी कोठी में जाते देखा। अंदाजा लगाया कि प्रथम बड़े घर का बेटा है। यहां से ही उसने अपहरण कर फिरौती मांगने की योजना बनाई।
आरोपी से प्रारंभिक पूछताछ में यह समाने आया है। उसके खिलाफ अपहरण, हत्या का प्रयास करने, पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाने और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जितेंद्र के पिता दिल्ली पुलिस से बतौर एएसआई हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं।
खुद का काम शुरू किया तो बना कर्जदार
मूल रूप से झज्जर जिले के गुभाना माजरा और हाल में शहर की फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी आरोपी जितेंद्र के पिता दिल्ली पुलिस में एएसआई पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वह पहले गुड़गांव स्थित एक बैंक में नौकरी करता था। नौकरी छोड़कर उसने बिल्डिंग मैटीरियल की दुकान खोल ली। इस काम में उस पर करीब 6-7 लाख रुपये कर्ज हो गया। कर्ज उतारने को लेकर वह परेशान रहने लगा।
4-5 दिन लगातार रैकी
अपहरण का ख्याल आते ही जितेंद्र ने बच्चे की रैकी शुरू कर दी। पूछताछ में सामने आया है कि उसने लगातार 4-5 दिन तक रैकी की। उसने बताया कि स्कूल बस प्रथम को घर के मोड़ पर टी-प्वाइंट पर छोड़कर जाती और वहीं से वह पैदल आता। अपहरण करने के लिए वह बस के पहुंचने से पहले ही वहां जाकर खड़ा हो गया। बस से उतरते ही बच्चे को उठा लिया और कार में डालकर फरार हो गया।
उम्मीद नहीं थी कि परिवार पुलिस के पास चला जाएगा
जितेंद्र का कहना है कि उसे पता था कि बच्चे का पिता कपूर सिंह अहलावत सरकारी ठेकेदार है और उसका रोड़ी-बजरी का क्रेशर भी है। वह काफी अमीर है। उसने यह कभी नहीं सोचा था कि 10 लाख रुपये की फिरौती के लिए परिवार पुलिस के पास चला जाएगा।
दिल्ली में दर्ज हैं शराब तस्करी के कई मामले
पुलिस आरोपी का आपराधिक रिकार्ड छान रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसके खिलाफ दिल्ली में ही शराब तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।
वर्जन :::
‘आरोपी जितेंद्र को 7 लाख रुपये का कर्ज उतारना था। 10 लाख रुपये की फिरौती मांगने के लिए उसने बच्चे का अपहरण किया। आरोपी उपचाराधीन है। उसके ठीक होने पर पूछताछ की जाएगी। आरोपी और पीड़ित परिवार के बीच कोई जान पहचान नहीं थी।’
सौरभ सिंह, डीआईजी एवं एसपी, रोहतक।