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एमवे फ्रॉडः बहुत पुरानी है फर्जीवाड़े की कहानी

Tue, 28 May 2013 03:52 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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नेटवर्क मार्केटिंग करने वाली कंपनी एमवे इंडिया के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विलियम एस. पिंकने और दो कंपनी निदेशकों को वित्तीय अनियमितता के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।
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पुलिस की अपराध शाखा के सूत्रों के मुताबिक, एमवे इंडिया के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम एस. पिंकने और दो निदेशकों संजय मल्होत्रा और अंशु बुद्धराजा को एक महिला द्वारा कंपनी की नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए हुए भारी नुकसान की शिकायत और पहले से दर्ज तीन अन्य मुकदमों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। आइए इस मामले पर बारीकी से निगाह डालें -

क्या करती है कंपनी?
एमवे डायरेक्ट सेलिंग मॉडल का इस्तेमाल कर फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) बेचती है। इस मॉडल के तहत ग्राहकों को ही कंपनी का एजेंट बनाया जाता है, जो दूसरे लोगों को सीधे तौर पर प्रोडक्ट बेचते हैं। एजेंट के बाद ग्राहक बनने वाले इन लोगों को सीधे तौर पर कमिशन नहीं मिलता। उन्हें सेल्स के जरिए दूसरे लोगों को शामिल करना होता है। कंपनी बोनस और रिवॉर्ड देने के लिए प्वाइंट सिस्टम रखती है।
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कानून क्या कहता है?
भारतीय कानून डायरेक्ट सेलिंग या मल्टीलेवल मार्केटिंग मॉडल की इजाजत नहीं देता। यह प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम (बेनिंग) एक्ट 1978 के तहत आते हैं।

कंपनी के खिलाफ क्या हैं आरोप?
केरल में कंपनी के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं। सभी मामले कमोबेश एक जैसे हैं, जिनमें कंपनी पर प्रोडक्ट के दाम जरूरत से ज्यादा बताना और दूसरी फर्जी गतिविधियों के इल्जाम हैं। एक मामले में विशालाक्षी ने आरोप लगाया है कि वह प्रोडक्ट को अगले स्तर के ग्राहकों को बेचने में नाकाम रहीं, इसलिए कंपनी ने उन्हें पैसे नहीं दिए। कंपनी के ऑफिस और गोदामों पर छापे मारकर नवंबर 2012 में 2.14 करोड़ रुपए के उत्पाद जब्त किए गए थे।

क्या पहले भी फंसी है कंपनी?
एमवे इंडिया पहले भी लपेटे में आ चुकी है। 2006 में आंध्र प्रदेश में एमवे के ऑफिस इन आरोपों पर बंद कर दिए गए थे कि वहां से पिरामिड स्कीम चलाई जा रही है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने भी कहा था कि एमवे का बिजनेस मॉडल मनी सर्कुलेशन स्कीम की तरह है और इसके कामकाज को उसने गैरकानूनी बताया था। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है।

कंपनी का क्या कहना है?
एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज का कहना है कि वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में उसने हमेशा जांच में सहयोग दिया है। एमवे ने सोमवार रात जारी एक बयान में कहा, 'पिंकने, अंशु और संजय की नुमाइंदगी में काम करने वाले हमारे प्रबंधन ने क्राइम ब्रांच की ओर से पूछे गए सभी जवाबों का हमेशा जवाब दिया है।'

और देशों में कैसा रहा एमवे का अनुभव?
एमवे सबसे पहले अमेरिका में 1974 में जांच के घेरे में आई थी। अमेरिका ने उस वक्त तीन मुद्दों पर गौर किया था। पहला, मल्टी-लेवल मार्केटिंग की स्कीम क्या है। दूसरा, आम लोगों के सामने इस स्कीम और कामकाज के तौर-तरीकों को कैसे पेश किया जाता है। और तीसरा, मल्टी-लेवल मार्केटिंग को लागू करने से जुड़ी चीजों पर गौर किया गया। कंपनी का दावा है कि चीन में वहां के कानूनों के हिसाब से ढालने के लिए उसने अपने बिजनेस मॉडल को नए सिरे से चमकाया।
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