देश की राजनीति में आम आदमी पार्टी (आप) के धमाकेदार आगाज ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के चुनावी समीकरण को गड़बड़ा दिया है।
सभी बड़े नेताओं के खिलाफ जानी मानी सामाजिक हस्तियों को चुनाव में उतारने की आप की रणनीति से राजनीतिक दलों में हलचल मची हुई है।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वैकल्पिक राजनीति की नींव पर खड़ी हुई आप की इमारत का फिलहाल कोई तोड़ किसी भी दल के पास नहीं है। सबसे बड़ी समस्या भाजपा और कांग्रेस के लिए खड़ी हुई है।
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भाजपा को डर है कि लोकसभा चुनाव मोदी बनाम राहुल न होकर कहीं वर्तमान राजनीति बनाम वैकल्पिक राजनीति न हो जाए। मोदी बनाम राहुल की लड़ाई में पहले से ही बुरी तरह पस्त कांग्रेस आप से निपटने का रास्ता नहीं निकाल पा रही।
वैसे भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आप के हाथों अपना परंपरागत वोट बैंक लुटवा चुकी है। हालांकि सभी दल एक स्वर से आप को भारतीय राजनीति का महज एक बुलबुला ही मान रहे हैं, मगर इन सभी को लोकसभा चुनाव से पहले यह बुलबुला फूटता नहीं दिख रहा है।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली सफलता से आप के हौसले बढ़े हुए हैं, वहीं मुख्यधारा के दलों की चिंता भी। दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रयोग को लोकसभा में आजमाने और इसके लिए बनाई गई शुरुआती रणनीति ने कई दलों को बेचैन कर दिया है।
दरअसल आप की योजना चुन चुन कर विभिन्न दलों के सभी बड़े नेताओं के खिलाफ बड़ी सामाजिक हस्तियों को उतारने की है। पार्टी ने सभी बड़े नेताओं की लोकसभा सीटों को चिन्हित कर उम्मीदवार तलाशने का काम भी शुरू कर दिया है।
आप के सूत्रों के मुताबिक अब तक 208 सीटों का खाका तैयार है। पार्टी मुख्य रूप से बड़े शहरों, बड़े नेताओं की सीटों पर फोकस करेगी।
इसके अलावा दिल्ली से सटे पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में पूरी ताकत झोंकने की योजना बन चुकी है। पार्टी लोकसभा चुनाव भी वर्तमान राजनीति बनाम वैकल्पिक राजनीति के मुद्दे पर लड़ेगी।
आप के उभरने से मुख्य परेशानी भाजपा और कांग्रेस में है। सेमीफाइनल मुकाबले को राहुल बनाम मोदी का रूप देकर विजय पताका फहरा चुकी भाजपा फाइनल मुकाबले में भी इसी फार्मूले के साथ बड़ी जीत के प्रति आश्वस्त थी। मगर अब उसे लोकसभा चुनाव में मुद्दा बदलने का डर सता रहा है।
पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि अगर फाइनल मुकाबले में मुद्दा राहुल बनाम मोदी की जगह वर्तमान राजनीति बनाम वैकल्पिक राजनीति हुई तो मुश्किलें खड़ी होंगी।
उधर, सेमीफाइनल मुकाबले में बुरी हार से त्रस्त कांग्रेस मोदी के बाद इस नए प्रतिद्वंद्वी के उदय से हलाकान है। विभिन्न राज्यों की सत्ता में काबिज दल और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्षेत्रीय दलों को भी लगता है कि आप की वैकल्पिक राजनीति देने का नया नारा उनके सामने भी मुसीबतें खड़ी कर सकता है।