जरूरी सेवाओं के लिए आधार नंबर या आधार कार्ड को जरूरी बनाने के कदम पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से निराशा हाथ लगी है।
उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व के फैसले को बदलने से इनकार किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।
अदालत ने कहा था कि आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड या नंबर को जरूरी नहीं बनाया जा सकता। इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार और तेल कंपनियों ने कोर्ट में अर्जी दी थी और फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।
सरकार का तर्क है कि आधार पर यदि फैसला नहीं बदला गया तो कई सरकारी स्कीमों को झटका लग सकता है।
कैश सब्सिडी योजना के तहत सरकार कई योजनाओं में आम लोगों को सीधे उसके खाते में सब्सिडी का पैसा देने जा रही है। इन योजनाओं को लाभ लेने के लिए बैंक खाते से आधार नंबर जोड़ने का प्रावधान है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट की दलील है कि आधार कार्ड नहीं होने की स्थिति में देश कि किसी भी नागरिक को परेशानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह एक स्वैच्छिक योजना है।
पीठ ने केंद्र से पूछा था कि क्या आप अवैध विस्थापितों को भी यह कार्ड मुहैया कराएंगे।
आप ऐसा नहीं कर सकते कि गैरकानूनी विस्थापितों को यह सुविधा दें। क्या आप आधार कार्ड जारी करने से पहले व्यक्ति की ओर से दिए गए कागजात की विस्तार की जांच करते हैं।
हम यह स्पष्ट कर देते हैं कि आधार कार्ड अवैध विस्थापितों को नहीं जारी किया जा सकता। इस कार्ड के महज कुछ लाभ हैं जो नागरिकों के लिए हैं।